By रेनू तिवारी | May 14, 2026
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए वैश्विक चुनौतियों पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों में BRICS उन देशों के लिए एक संबल बन सकता है जो ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
सक्रिय भागीदारी: अब तक सभी सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ 80 से अधिक BRICS बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिन्होंने आपसी संबंधों को और गहरा किया है।
साझेदार देशों के साथ संवाद: एक समावेशी और सहयोगी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए अध्यक्ष के रूप में भारत लगातार साझेदार देशों के साथ बातचीत कर रहे है।
आम सहमति का सम्मान: उन्होंने स्पष्ट किया कि समूह की सुचारू प्रगति के लिए यह आवश्यक है कि नए और बाद में शामिल होने वाले सदस्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर BRICS की स्थापित आम सहमति का समर्थन करें।
विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि यह बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारी उथल-पुथल के दौर में हो रही है। उन्होंने उन कारकों का उल्लेख किया जो वर्तमान में वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित कर रहे हैं:
निरंतर संघर्ष: दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्ध और तनाव।
आर्थिक अनिश्चितता: वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और व्यापारिक चुनौतियां।
टेक्नोलॉजी और प्रतिस्पर्धा: व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में उभरती नई चुनौतियां।
जयशंकर ने कहा कि विशेष रूप से उभरते बाजारों (Emerging Markets) के बीच यह उम्मीद बढ़ रही है कि BRICS वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक स्थिरता लाने वाली शक्ति के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि सदस्य देशों के बीच होने वाली चर्चाएं वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर गहराई से विचार करने और साझा समाधान खोजने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।
एस. जयशंकर का यह बयान वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका और BRICS के माध्यम से 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की आवाज को बुलंद करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। ऊर्जा और भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों पर ध्यान केंद्रित कर BRICS खुद को एक अधिक प्रभावी और प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में स्थापित करने की ओर अग्रसर है।
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