दुल्हन तैयार हो रही है... (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Aug 08, 2022

रात के पौने दस बज चुके थे। जितने मेहमान आ सकते थे आ चुके थे। सभी मनपसंद कपड़े पहने हुए थे। नदी किनारे रिसोर्ट के खुले आंगन में ठण्ड थी। दुल्हा अपने दोस्तों के साथ अस्त व्यस्त दिख रहा था । अपने आप से कह रहा था, कहां रह गई। किसी ने व्यंग्य से पूछा अब क्या देर है जी, जवाब रहा दुल्हन आ रही है। शादी में जाओ हर कार्यक्रम में दुल्हन का आना बाकी रहता है। सारा आयोजन लेट हो रहा होता है लेकिन दुल्हन की तैयारी पूरी नहीं होती। अगली शाम एक और शादी में जाना हुआ, सौ किलोमीटर रास्ते में ट्रैफिक रेंगता रहा। जाम की हद, एक चौराहे पर एक घंटा लग गया, घिसटते घिसटते पता चल गया कि पैट्रोल कैसे जलता है। शादी में पहुंचते पहुंचते तेल निकल गया।   

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दुल्हन का तैयार होना अब सरकारी योजना के कार्यान्वन जैसा हो गया है। सभी मेहमान आ चुके हैं बच्चे किसी गेंद की तरह इधर उधर गिर रहे हैं। ब्रैड पकौडे ठंडे हो गए हैं, पास खड़ा वेटर सोच रहा है कि दोबारा गर्म अभी कर दूं या बाद में। दुल्हन डेढ़ घंटा देर से प्रवेश करती है। स्वाभाविक है उसने इस ख़ास अवसर के लिए ख़ास ड्रेस पहनी है। पार्टी ड्रेस में सखियां उसके साथ हैं। पंडितजी अपना काम पंद्रह मिनट में निपटा देते हैं। नाच गाना शुरू हो जाता है। दुल्हन ने अभ्यास की हुई शैली में नाचना शुरू कर दिया है। नाच गाना खाना पीना रात बारह बजे तक चलता है लेकिन नाच के शौक़ीन रुकते नहीं क्यूंकि काकटेल उन्हें शाबासी देती रहती है। डीजे वाला जाना चाहता है फिर भी जाते जाते एक दो गाने बजा देता है।

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इतना तैयार होकर आई दुल्हन जाने को तैयार नहीं। अपनी शादी के लिए वह इतने दिनों से तैयारी कर रही थी इसलिए उसे नाचना भी खूब है। अपनी सखियों और सखाओं के साथ चियर्स करती हुई एक पैग और खींचती है। अगले दिन सुबह ग्यारह बजे नाना के परिवार जनों समेत पूजा है। साढ़े ग्यारह बजे पत्नी कहती है जाओ नीचे देखकर आओ कुछ हो रहा है या नहीं। पौने बारह बजे नीचे आता हूं। पंडितजी नहा धोकर बैठे हैं, उनके रंगे हुए बाल ज़्यादा चमक रहे हैं। दुल्हन के पिता भारतीय संस्कृति में डूबी नई ड्रेस पहन कर आए हैं। कुछ लोग उनके पास बैठे हैं। पंडितजी पूछते हैं दुल्हन... जी वो तैयार हो रही है, पिताजी वाक्य पूरा करते हैं। दुल्हन सचमुच तैयार होकर एक घंटे बाद आती है। उसके साथ रात वाली सखियां हैं। उन सब की आँखों में नींद अभी लेटी हुई है। अच्छे से तैयार होने में वक़्त तो लगता है। 

दुल्हन की तैयारी से प्रेरित होकर, बच्चों के जन्मदिन आयोजन के लिए भी तैयार होने की सांस्कृतिक परम्परा विकसित हो चुकी है। पूरी दुनिया हमसे प्रेरणा ले रही है। छोटी बात तो है नहीं, दुल्हन तैयार होने का मामला है।  

- संतोष उत्सुक

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