भगोड़ों के छिपने की जगह बनने का ब्रिटेन का कोई इरादा नहीं : ब्रिटिश सुरक्षा मंत्री टुगेंडहट

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 13, 2023

ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री टॉम टुगेंडहट ने अरबपति भगोड़े विजय माल्या और नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए भारत द्वारा लगातार दबाव बनाये जाने के बीच कहा है कि ऐसी जगह बनने का उनके देश का कोई इरादा नहीं है, जहां न्याय के दायरे में आने से बचने की कोशिश कर रहे लोग छिप सकें। टुगेंडहट ने किसी विशेष मामले का जिक्र किए बिना कहा कि प्रत्यर्पण संबंधी मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने पीटीआई-से साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम दोनों (ब्रिटेन और भारत) की कानूनी प्रक्रियाएं हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है, लेकिन ब्रिटेन सरकार इस बात को लेकर बिल्कुल स्पष्ट है कि ऐसी जगह बनने का हमारा कोई इरादा नहीं है जहां न्याय से बचने की कोशिश कर रहे लोग छिप सकें।’’ टुगेंडहट ने ब्रिटेन में रह रहे माल्या और नीरव मोदी समेत कई आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण की भारत की मांग से जुड़े एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की।

हमने आपकी उत्तरी सीमा पर घटनाएं देखी हैं। हमने प्रौद्योगिकी में हुए बदलावों और इससे निपटने के तरीकों पर भी बात की। हमने उन क्षेत्रों पर गौर किया, जिनमें अधिक सहयोग की आवश्यकता है।’’ उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि कैसे भारत और ब्रिटेन कृत्रिम मेधा (एआई) से संबंधित नई प्रौद्योगिकियों में सहयोग कर रहे हैं। टुगेंडहट ने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि आज भारत न केवल भारतीय एआई, बल्कि ब्रितानी एआई का भी केंद्र है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कई कंपनियों के डेटा स्रोत यहां, मुख्य रूप से बेंगलुरु में हैं और वे कंपनियां डेटा के विश्लेषण एवं अपने कारोबारों की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए भारतीय एआई विशेषज्ञों की असाधारण तकनीकी क्षमताओं का उपयोग कर रही हैं।’’ टुगेंडहट ने कहा, ‘‘यह ब्रिटेन और निश्चित रूप से भारत, दोनों के लिए लाभकारी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘...हम अपने हितों की रक्षा कर रहे हैं और हम उन प्रौद्योगिकियों को विकसित कर रहे हैं, जो हमारे साझा भविष्य के लिए बहुत आवश्यक हैं।’’ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ब्रिटेन के उनके तत्कालीन समकक्ष बोरिस जॉनसन के बीच मई 2021 में हुई भारत-ब्रिटेन डिजिटल शिखर वार्ता में दोनों देशों के संबंधों को ‘समग्र रणनीतिक साझेदारी’ के मुकाम पर पहुंचाया गया था।शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने व्यापार और अर्थव्यवस्था, रक्षा, जलवायु परिवर्तन और लोगों के बीच आपसी संबंध के प्रमुख क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने के लिए 10 साल का एक ‘रोडमैप’ अपनाया था।

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