By अनुराग गुप्ता | Jul 26, 2021
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है। एक बार फिर से प्रदेश के ब्राह्मण वोट बैंक को साधने का प्रयास किया जा रहा है। जहां मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने ब्राम्हणों के जरिए फिर से सत्ता से बैठने का सपना देखा है। वहीं अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी ने भी (कवायद) तेज कर दी है।
पुलिस ने बिकरू में गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने की योजना बनाई थी तब विकास दुबे और उसके सहयोगियों ने पुलिस पर घात लगाकर हमला कर दिया था। इस हमले में आठ पुलिसकर्मियों की मौके पर ही मौत हो गई थी और कुछ पुलिसकर्मी अपनी जान बचाने में सफल हो गए थे। लेकिन पुलिसकर्मियों की हत्या करने के बाद कैसे विकास दुबे और उसके गैंग के अपराधी बच जाते। अगली सुबह पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए विकास दुबे के गैंग के कई अपराधियों को ढेर कर दिया।जिसमें विकास दुबे का शूटर अमर दुबे भी शामिल था। इसी अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे है। जिससे कुछ वक्त पहले ही अमर दुबे ने शादी की थी। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने कई गंभीर धाराओं के तहत खुशी दुबे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और उसे जेल भेज दिया। खुशी दुबे की धाराओं इतनी ज्यादा गंभीर हैं कि उन्हें कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भी जमानत नहीं मिल सकी। ऐसे में बसपा ने खुशी दुबे को बाहर निकालने का प्रण लिया है।बसपा को लगता है कि खुशी दुबे की लड़ाई लड़कर वह नाराज ब्राह्मणों को अपने पाले में कर सकती है। क्योंकि अमर दुबे के एनकाउंटर के कुछ दिन पहले ही दोनों की शादी हुई थी और लोगों का मानना है कि इतने कम समय में खुशी अमर दुबे के परिवार को ही सही ढंग से नहीं जान पाई होगी। ऐसे में भला वह कैसे विकास दुबे की गैंग का हिस्सा हो सकती है। इतना ही नहीं प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के नेता भी खुशी दुबे की रिहाई की आवाज उठा चुके हैं
प्राप्त जानकारी के मुताबिक भाजपा नेता उमेश द्विवेदी ने खुशी दुबे की रिहाई की मांग को लेकर एक पत्र लिखा था। हालांकि, कुछ बात नहीं बन सकी थी। लेकिन प्रदेश चुनाव से पहले सतीश चंद्र मिश्र खुशी दुबे को जमानत दिलाने का प्रयास करेंगे।