Jammu में Drug Peddlers के खिलाफ Bulldozer Action, Srinagar में आतंकवादियों के चार मददगार गिरफ्तार, आतंकी की संपत्ति कुर्क

By नीरज कुमार दुबे | Apr 23, 2026

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने एक साथ कई मोर्चों पर सख्त कार्रवाई करते हुए नशा तस्करी और आतंकवाद के खिलाफ अपने “जीरो टॉलरेंस” रुख को और स्पष्ट कर दिया है। ड्रग माफियाओं के खिलाफ जम्मू के राजीव नगर में बड़े पैमाने पर बुलडोज़र कार्रवाई, श्रीनगर में आतंकियों के मददगारों की गिरफ्तारी और एनआईए की ओर से जैश के एक आतंकी की संपत्ति की कुर्की की घटनाओं ने मिलकर एक व्यापक सुरक्षा रणनीति की तस्वीर पेश की है।

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यह कार्रवाई “नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर” अभियान के तहत की गई, जिसे उपराज्यपाल प्रशासन सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले भी बेलीचराना समेत कई इलाकों में इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है। स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे इलाके को सुरक्षित बनाने की दिशा में जरूरी बताया वहीं प्रशासन ने कहा कि माफियाओं को सख्त संदेश दिया गया है।

दूसरी ओर, श्रीनगर में आतंकवाद के खिलाफ मोर्चे पर भी सुरक्षा एजेंसियों को अहम सफलता मिली है। पुलिस ने हजरतबल इलाके से एक महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जो आतंकवादियों को रसद और अन्य सहायता मुहैया करा रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों में जाहूर अहमद मीर, बशीर अहमद भट, गुलाम मोहम्मद भट और शाजिया मोहम्मद शामिल हैं। इनके कब्जे से एक हथगोला, एके-47 की 15 गोलियां, चार मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई है। इन पर Unlawful Activities (Prevention) Act (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के ओवरग्राउंड नेटवर्क को भी व्यवस्थित तरीके से ध्वस्त करने में जुटी हैं।

इसी कड़ी में National Investigation Agency (एनआईए) ने भी बड़ी कार्रवाई करते हुए Jaish-e-Mohammed के एक आतंकी फैयाज अहमद मगरे की संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई 2017 में लेथपोरा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हुए फिदायीन हमले के मामले में की गई है, जिसमें पांच जवान शहीद हुए थे। कुर्क की गई संपत्तियों में पुलवामा जिले के लेथपोरा क्षेत्र में स्थित जमीन और आवासीय परिसर शामिल हैं, जिन्हें आतंकवाद से अर्जित संपत्ति माना गया है। यह कदम अदालत के आदेश के बाद उठाया गया और इसका उद्देश्य आतंकवाद की आर्थिक जड़ों को खत्म करना है।

देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर में अब सुरक्षा नीति केवल आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके आर्थिक स्रोतों, सहयोगियों और सामाजिक नेटवर्क पर भी सीधा प्रहार किया जा रहा है।

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