By रेनू तिवारी | Sep 05, 2026
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय परिसर के भीतर बनी एक मस्जिद को रात भर चले ऑपरेशन में गिरा दिया गया। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण करार दिया गया था। इसके साथ ही मस्जिद कमेटी पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है।समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने बाद में दावा किया कि उन्हें कैराना स्थित उनके घर पर नज़रबंद कर दिया गया था।
हसन ने कहा, "कल रात मुझे सहारनपुर जाने से रोकने के लिए मेरे कैराना स्थित घर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और मुझे नज़रबंद कर दिया गया।" गौरतलब है कि सहारनपुर ज़िला कैराना के अंतर्गत आता है।
32 वर्षीय सांसद ने सवाल उठाया कि क्या अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों से मिलना किसी चुने हुए सांसद के लिए अपराध हो गया है। उन्होंने कहा, "लोकतंत्र में, जन-प्रतिनिधियों को लोगों की आवाज़ उठाने के लिए चुना जाता है। मुझे रोककर उस आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।"
मस्जिद क्यों गिराई गई?
मस्जिद गिराने की कार्रवाई बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय समन्वयक विकास त्यागी की शिकायत के बाद की गई। उन्होंने आरोप लगाया था कि सहारनपुर में DM ऑफिस कॉम्प्लेक्स के अंदर मस्जिद का अवैध निर्माण किया गया था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि इस जगह का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए किया जा रहा था, जिसमें पोस्ट ऑफिस और बाहरी लोगों को किराए पर दिए गए कमरे शामिल थे, और मस्जिद कमेटी किराया वसूल रही थी।
सुनवाई के बाद, सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह ने इस ढांचे को तुरंत गिराने का आदेश दिया। प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई ज़रूरी थी क्योंकि उस जगह पर कब्ज़े और गतिविधियों से सरकारी दफ़्तर की सुरक्षा और गोपनीयता से समझौता हो रहा था।
समाजवादी पार्टी ने BJP सरकार की आलोचना की
समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने हसन को सहारनपुर जाने से रोका ताकि वह मस्जिद गिराए जाने का मुद्दा न उठा सकें।
SP प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को ट्वीट किया, "सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी और उसकी उपलब्धि भी है।" सहारनपुर में तोड़-फोड़ की कार्रवाई उत्तर प्रदेश में उन धार्मिक ढांचों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का हिस्सा है, जिन्हें अधिकारी अवैध या कब्ज़े वाली ज़मीन पर बना हुआ बताते हैं। इस तरह की कार्रवाई को कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है, जिसमें तोड़-फोड़ से पहले कोर्ट के आदेशों और सुरक्षा उपायों का पालन करने का मुद्दा भी शामिल है।
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