खुदरा व्यापार वालों के लिए सिरदर्द बना अमेजन और फ्लिपकार्ट, कैट ने उठाए सख्त कदम

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 04, 2019

नयी दिल्ली। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने अमेज़नऔर फ्लिपकार्ट सहित उन सभी ई -वाणिज्य कंपनियों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है जो भारत सरकार की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का उल्लंघन करते हुए देश के खुदरा व्यापार को तहस नहस करने में लगे हैं। कैट की यहां जारी विज्ञप्ति में यह कहा गया है। कैट का आरोप है कि ई- वाणिज्य कंपनियां देश के 7 करोड़ व्यापारियों के व्यापार को तबाह करने में जुटी हैं। कैट ने इस मुद्दे को देश के व्यापारियों के व्यापार के लिए बेहद घातक बताते हुए अब सड़क पर उतरने का मोर्चा भी खोल दिया है।

कैट ने हालांकि, इस मुद्दे पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल को पहले ही इन कंपनियों के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा दे रखा है जिसको लेकर वाणिज्य मंत्रालय ने अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट से जवाब तलब किया है। कैट ने राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर बेंच में भी इस मुद्दे पर एक याचिका दायर की है। कैट का आरोप है कि अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट पहले की तरह अपने पोर्टल पर लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, उत्पादों पर भारी छूट देना, पोर्टल पर होने वाली बिक्री को नियंत्रित करना, अपनी पसंद के विक्रेताओं को अपने पोर्टल पर ज्यादा आर्डर देना और बाज़ार में कीमतों को प्रभावित करने की कार्रवाई में लिप्त हैं।

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उल्लेखनीय है कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले महीने कहा था कि सरकार इन कंपनियों की कथित बाजार बिगाडू मूल्य निर्धारण पर गौर कर रही हे। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया एवं राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने अमेज़न और फ्लिपकार्ट के रवैए की कड़ी आलोचना करते हुए कहा की कैट इस मुद्दे पर शीघ्र ही एक राष्ट्रीय आंदोलन शुरू करेगा।

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आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए आगामी 10 नवम्बर को दिल्ली में कैट की राष्ट्रीय गवर्निंग काउन्सिल की आपात बैठक बुलाई गई है।  भरतिया एवं खंडेलवाल ने आंदोलन के विभिन्न चरणों की जानकारी देते हुए बताया की 13 नवम्बर को कैट के व्यापारी प्रतिनिधिमंडल देश भर में लोकसभा और राज्य सभा के सभी सांसदों को ज्ञापन देंगे । 20 नवम्बर को देश के सभी राज्यों में लगभग 200 शहरों में धरने आयोजित किए जाएँगे । 25 नवम्बर को देश के 500 से अधिक ज़िलों में व्यापारी मार्च निकाले जाएँगे और ज़िला कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम के ज्ञापन दिए जाएँगे । इन कम्पनियों के अनैतिक व्यापार के ख़िलाफ़ देश के लगभग एक हज़ार से अधिक शहरों में विरोध मार्च निकाले जाएँगे। 

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