By अभिनय आकाश | Aug 12, 2026
भारत-इटली संबंधों के सीनियर एनालिस्ट और सलाहकार कार्लो लोम्बार्डी ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) अमेंडमेंट बिल में प्रस्तावित बदलावों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच-पड़ताल करना देश के हित में है, क्योंकि इन फंड्स का इस्तेमाल विदेश नीति के औजार के तौर पर भी किया जा सकता है। बिल के इतिहास का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह कानून सबसे पहले 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय संसद द्वारा पारित किया गया था। लोम्बार्डी ने कहा, 2010 में मनमोहन सिंह की सरकार ने इसमें बड़े बदलाव किए थे, और असल में उस समय यह कानून और भी ज़्यादा सख्त था।
FCRA जैसे कानून वाले दूसरे देशों के बारे में बात करते हुए लोम्बार्डी ने कहा कि पश्चिमी देशों में ऐसे कानून कई दशकों से मौजूद हैं। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई, जिसने 1938 में 'फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट' पास किया था। ऐसा जर्मनी के उस गुप्त प्रभाव का मुक़ाबला करने के लिए किया गया था, जिसके ज़रिए जर्मनी अमेरिका की नीति को 'नेशनल सोशलिस्ट जर्मनी' की तरफ़ मोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और UK जैसे देश भी हैं।