FCRA संशोधन बिल नियंत्रण के लिए, पारदर्शिता के लिए नहीं: Shashi Tharoor का आरोप

Shashi Tharoor
ANI
अंकित सिंह । Aug 6 2026 12:14PM

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने FCRA संशोधन विधेयक 2026 को पारदर्शिता के बजाय नियंत्रण के लिए बताया है, आरोप है कि यह बिल विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठनों की संपत्ति पर सरकार को अत्यधिक अधिकार देता है। उन्होंने 'नामित प्राधिकरण' को फंड और भौतिक संपत्तियों पर नियंत्रण के अधिकार की आलोचना की है, जिसे पंजीकरण निलंबित या रद्द होने पर सरकार भारत की संचित निधि में जमा कर सकेगी। थरूर का कहना है कि यह संशोधन पारंपरिक कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर देता है और नियंत्रण का अभूतपूर्व तरीका लागू करता है, जिसका असर चैरिटेबल ट्रस्टों पर पड़ेगा।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रस्तावित 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे पारदर्शिता के बजाय नियंत्रण वाला कदम बताया है और आरोप लगाया है कि यह विधेयक विदेशी योगदान पाने वाले संगठनों की संपत्ति पर सरकार (कार्यपालिका) को बहुत ज़्यादा अधिकार देता है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' में छपे एक लेख में थरूर ने तर्क दिया कि प्रस्तावित संशोधनों से नियंत्रण का एक ऐसा अभूतपूर्व तरीका लागू होगा जो पारंपरिक कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर देता है।

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उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मॉनसून सत्र के दौरान 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' को पारित कराने की कोशिश कर सकती है। थरूर ने बिल के उस प्रस्ताव की आलोचना की जिसमें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक 'डेज़िग्नेटेड अथॉरिटी' (नामित प्राधिकरण) बनाने की बात कही गई है। इस अथॉरिटी को किसी संगठन के विदेशी फंड और भौतिक संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार होगा, यदि उस संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन सस्पेंड, रद्द या उसका रिन्यूअल नामंजूर कर दिया जाता है। उन्होंने लिखा कि इस संशोधन से नियंत्रण का एक ऐसा अभूतपूर्व तरीका लागू किया जा रहा है जो पारंपरिक कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार करता है।

थरूर के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे के तहत संपत्ति को अस्थायी रूप से 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) को सौंपा जा सकेगा। इससे सरकार ऐसी संपत्तियों का प्रबंधन कर सकेगी और अंततः उन्हें बेच सकेगी, साथ ही बिक्री से प्राप्त राशि को 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) में जमा कर सकेगी—भले ही उस संपत्ति के लिए विदेशी योगदान से केवल आंशिक रूप से ही धन जुटाया गया हो।

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उन्होंने डीम्ड सेसेशन के प्रस्तावित कॉन्सेप्ट पर भी आपत्ति जताई। इस नियम के तहत, अगर तय समय के अंदर FCRA रजिस्ट्रेशन को रिन्यू नहीं किया जाता या उसके लिए अप्लाई नहीं किया जाता, तो रजिस्ट्रेशन अपने आप खत्म हो जाएगा, जिससे विदेशी फंड और उससे जुड़ी संपत्तियों तक पहुंच तुरंत रुक जाएगी। अपने गृह राज्य केरल की संस्थाओं का ज़िक्र करते हुए थरूर ने कहा कि ईसाइयों द्वारा चलाए जा रहे चैरिटेबल ट्रस्ट, अस्पताल, स्कूल, मेडिकल कॉलेज और कल्याणकारी संगठन, घरेलू संसाधनों और विदेशी अनुदानों के मेल से पीढ़ियों से हाशिए पर मौजूद समुदायों की सेवा करते आ रहे हैं।

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