समाजवाद आंदोलन से निकले राजनीति के युवा तुर्क थे चंद्रशेखर

By अंकित सिंह | Jul 08, 2022

भारतीय राजनीति में युवा तुर्क के नाम से मशहूर पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर अपने साहसी विचार और अडिग विश्वास की वजह से आज भी याद किए जाते हैं। चंद्रशेखर को जमीन से जुड़ा नेता माना जाता है। राजनीति के केंद्र में रहने के बावजूद भी उन्होंने अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा था। यही कारण था कि बड़े से बड़े नेता भी उन्हें सम्मान करते थे। एक प्रखर वक्ता होने के साथ-साथ चंद्रशेखर लोकप्रिय राजनेता, विद्वान लेखक और बेबाक समीक्षक थे। खुलकर और बेहिचक बोलना उनकी आदत रही है और तीखे तेवरों की वजह से वह दिल्ली की राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा में रहते थे। ज्यादातर राजनेताओं से नहीं बनने के बावजूद भी अपने मजबूत इरादों की बदौलत वह देश के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचे। चंद्रशेखर ने आठवें प्रधानमंत्री के रूप में इस पद को सुशोभित किया। चंद्रशेखर अपने आदर्शवाद के लिए भी राजनीति में बेहद चर्चित रहे।


चंद्रशेखर का जन्म 1 जुलाई 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया के इब्राहिमपट्टी के एक किसान परिवार में हुआ था। वह राजपूत समुदाय से जरूर आते थे। लेकिन जीवन भर उन्होंने आम लोगों के मुद्दे को उठाया है। कॉलेज के दिनों से ही वह राजनीति में सक्रिय हो गए। चंद्रशेखर आचार्य नरेंद्र देव और राम मनोहर लोहिया से काफी प्रेरित थे। यही कारण रहा कि वे प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जुड़ गए और 1 साल के ही भीतर उन्हें इसका सचिव चुन लिया गया। 1955-56 के दौरान उत्तर प्रदेश प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में भी इन्होंने काम किया। चंद्रशेखर लगातार राजनीति की सीढ़ियों को चढ़ते गए। उन्हें 1962 में पहली बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया। 1964 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए और 1967 में कांग्रेस संसदीय दल के महासचिव चुने गए। चंद्रशेखर ने 1969 में यंग इंडियन पत्रिका की शुरुआत की थी। हालांकि आपातकाल के दौरान इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

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चंद्रशेखर 1973-75 के राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान जयप्रकाश नारायण से काफी प्रभावित हुए और कांग्रेस में रहने के बावजूद भी इंदिरा गांधी सरकार की आलोचना करने से पीछे नहीं हटे। यही कारण रहा कि 1975 में आपातकाल लागू होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और पटियाला जेल भेज दिया गया। बाद में चंद्रशेखर ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया। 1977 में आम चुनाव में मोरारजी देसाई की सरकार बनी। उस वक्त चंद्रशेखर जनता पार्टी के अध्यक्ष थे। चंद्रशेखर को मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए कहा गया। लेकिन उन्होंने साफ तौर पर इंकार कर दिया। 1977 में ही पहली बार चंद्रशेखर ने बलिया से लोकसभा चुनाव जीता था। चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी से दिल्ली के राजघाट तक पदयात्रा की जिसे भारत यात्रा भी कहा गया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को उजागर करना और उनका समाधान करना था। 


हालांकि चंद्रशेखर को 1984 के चुनाव में बलिया से कामयाबी नहीं मिल पाई। लेकिन चंद्रशेखर 1989, 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार बलिया से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचते रहे। वी पी सिंह के साथ 1984 के बाद चंद्रशेखर के रिश्ते बिगड़ गए। यही कारण रहा कि उन्होंने जनता दल समाजवादी गुट का गठन कर लिया। 1990 में वह कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री वीपी सिंह को अपदस्थ करने में कामयाब रहे। उन्होंने संसद में विश्वासमत जीता और प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। वह 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के आठवें प्रधानमंत्री रहे। हालांकि चंद्रशेखर ने कांग्रेस के हिसाब से चलने से इंकार कर दिया जिसकी वजह से उनकी सरकार 7 महीने में ही गिर गई। प्रधानमंत्री बनने से पहले चंद्रशेखर का भी मंत्री नहीं बने थे। वे पैसों की राजनीति को दरकिनार करके समाज में बदलाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थक थे। चंद्रशेखर का निधन 8 जुलाई 2007 को नई दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हुआ। भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने राजनीति में जो सुचिता दिखाई है, वह आज भी हम सब को प्रेरित करती हैं।


- अंकित सिंह

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