By एकता | Oct 23, 2026
2026 की चारधाम यात्रा के लिए कपाट बंद होने की तारीखें घोषित हो चुकी हैं। इस साल गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर, केदारनाथ और यमुनोत्री के कपाट 11 नवंबर और बद्रीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे। बद्रीनाथ के कपाट रात 9:37 बजे बंद होंगे। इन तारीखों की घोषणा विजयदशमी, 20 अक्टूबर 2026 को बदरी-केदार मंदिर समिति ने की।
गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर को अन्नकूट यानी गोवर्धन पूजा के दिन दोपहर 12:05 बजे बंद होंगे। यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के दिन सुबह 10:28 बजे बंद होंगे। इसी दिन केदारनाथ धाम के कपाट सुबह 8:30 बजे बंद किए जाएंगे। वहीं, बद्रीनाथ धाम के कपाट 16 नवंबर को रात 9:37 बजे बंद होंगे।
कुछ यात्रा वेबसाइटों पर पहले बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की संभावित तारीख 13 नवंबर बताई गई थी। हालांकि, विजयदशमी के दिन घोषित आधिकारिक तारीख 16 नवंबर है।
बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने से पहले पांच दिनों तक पारंपरिक पंच पूजा होगी। 12 नवंबर को भगवान गणेश की विशेष पूजा होगी और शाम को गणेश मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। 13 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे।
14 नवंबर को गर्भगृह में वेद ऋचाओं का वाचन और खड्ग पुस्तक पूजन किया जाएगा। 15 नवंबर को माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित किया जाएगा। इसके बाद रावल उन्हें भगवान नारायण के साथ गर्भगृह में विराजमान होने का निमंत्रण देंगे। 16 नवंबर को माता लक्ष्मी गर्भगृह में विराजमान होंगी और रात 9:37 बजे बद्रीनाथ के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
इसके अगले दिन यानी 17 नवंबर को उद्धव धाम और कुबेर धाम की डोली आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के साथ पांडुकेश्वर के लिए रवाना होगी। वहीं, गरुड़ धाम ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर जाएंगे।
पंचकेदार के दूसरे प्रमुख धामों के कपाट बंद होने की तारीख भी तय है। तुंगनाथ के कपाट 6 नवंबर को बंद होंगे और उनकी डोली 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी। वहीं, मदमहेश्वर के कपाट 16 नवंबर को बंद होंगे और उनकी डोली 19 नवंबर को ऊखीमठ पहुंचेगी।
चारधाम के ये मंदिर करीब 3,000 से 3,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित हैं। नवंबर से यहां भारी बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से करीब छह महीने तक मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं। अप्रैल या मई में, आमतौर पर अक्षय तृतीया के आसपास, कपाट दोबारा खोले जाते हैं।
कपाट बंद होने का मतलब यह नहीं है कि पूजा-अर्चना पूरी तरह रुक जाती है। सर्दियों में देवताओं की डोली कम ऊंचाई वाले शीतकालीन स्थानों पर ले जाई जाती है, जहां पूरे सर्दियों में पूजा जारी रहती है।
यमुनोत्री में मां यमुना की डोली खरसाली गांव जाती है, जबकि गंगोत्री में मां गंगा की डोली मुखबा यानी मुखवा गांव ले जाई जाती है। केदारनाथ में बाबा केदार की उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचती है। वहीं, बद्रीनाथ की शीतकालीन पूजा पांडुकेश्वर और जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में होती है।
कई श्रद्धालु सर्दियों में इन शीतकालीन स्थानों पर भी दर्शन के लिए जाते हैं। यहां मुख्य यात्रा सीजन की तुलना में भीड़ कम और माहौल शांत रहता है। इसलिए जो लोग मुख्य यात्रा सीजन में चारधाम नहीं जा पाए, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
कपाट बंद होने से पहले के दिन पहाड़ों में बेहद खूबसूरत होते हैं। साफ हवा और बर्फ से ढकी चोटियां देखने को मिलती हैं। हालांकि, इसी दौरान ठंड काफी बढ़ जाती है और मौसम भी तेजी से बदल सकता है। इसलिए यात्रा पर जाने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
कपाट बंद होने की तारीख नजदीक आने पर होटल, टैक्सी और हेलीकॉप्टर की बुकिंग जल्दी भर सकती है, इसलिए पहले से बुकिंग कर लें। चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण भी जरूरी है और इसकी प्रिंट या डिजिटल कॉपी अपने पास रखें।
ठंड को देखते हुए सामान की पैकिंग करें। थर्मल, भारी जैकेट, ऊनी टोपी, दस्ताने, गर्म मोजे, रेनकोट और आरामदायक जूते जरूर साथ रखें। यात्रा कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव रखने की कोशिश करें, क्योंकि जल्दी बर्फबारी या बारिश की वजह से सड़क और हेलीकॉप्टर सेवा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में एक अतिरिक्त दिन रखना काम आ सकता है।
पहाड़ों में सुबह मौसम आमतौर पर साफ रहता है, इसलिए सुबह जल्दी निकलना बेहतर होता है। इससे दर्शन के लिए भीड़ भी अपेक्षाकृत कम मिल सकती है। यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पिएं, धीरे-धीरे चलें और अपनी नियमित दवाइयां साथ रखें। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
यात्रा पर निकलने से पहले कपाट बंद होने की तारीख और समय दोबारा जांच लें, क्योंकि मौसम या मंदिर समिति के फैसले के कारण कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है।