मुख्यमंत्री के निर्देश कलेक्टर्स जिले की बस्तियों में कोरोना नियंत्रण पर रखें नज़र

By दिनेश शुक्ल | May 25, 2020

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोरोना संक्रमण को लेकर प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को निर्देशित किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश में कोरोना नियंत्रण के प्रयासों में मिल रही सफलता के बावजूद निरंतर डटे रहने की आवश्यकता है। कलेक्टर्स जिले की बस्तियों पर नजर रखते हुए रैण्डम टेस्ट करवाने और फीवर क्लीनिक प्रभावी ढंग से कार्य करें इसके लिए प्रयासरत रहें। जिले के किसी भी क्षेत्र में पॉजिटिव प्रकरण आते ही आने वाले दिनों की स्थिति का अनुमान लगाकर तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री चौहान रविवार को मंत्रालय में प्रदेश में कोरोना नियंत्रण और उपचार प्रयासों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण से स्वस्थ होने वालों का रिकवरी रेट 51.3 प्रतिशत है। यह निरंतर बढ़ रहा है, जो शुभ संकेत है। 

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अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मोहम्मद सुलेमान ने बताया कि मध्यप्रदेश में 24 मई तक 6 हजार 665 कोरोना के प्रकरण आए हैं, जिनमें 2967 एक्टिव केसेस हैं। इनमें 3408 रिकवरी केसेस हैं। प्रदेश का रिकवरी रेट 51.3 प्रतिशत है। भोपाल में यह प्रतिशत 63 है। प्रदेश में अब दुगने प्रकरण होने का क्रम 20 वें दिन ही आ रहा है, जो अन्य राज्यों से बेहतर है। दिनाँक 24 मई को 294 पॉजिटिव प्रकरण आने के बावजूद रिकवरी दर में सुधार के कारण 141 केसेस रिकवर हुए हैं। प्रदेश में ऐसे 25 जिलों जहाँ 10 से अधिक प्रकरण पाए गए हैं उनमें 41 हजार 640 लोग घरों में और 2109 संस्थागत रूप से क्वारेंटाइन किए गए। इन जिलों के 802 कंटेनमेंट क्षेत्र में कुल 13 लाख 32 हजार 945 लोग निवास करते हैं। 

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प्रदेश के कुछ जिलों जैसे हरदा, छिंदवाड़ा और अलीराजपुर में पिछले 21 दिन में कोई भी पॉजिटिव प्रकरण सामने नहीं आया है। नरसिंहपुर में प्रथम पॉजिटिव केस प्रकाश में आया है। कटनी जिले में भी कोई प्रकरण नहीं पाया गया है। जिन जिलों में एक्टिव केसेस देखे जा रहे हैं वहाँ सर्वे दल सक्रिय हैं और विभिन्न विभागों की ओर से आवश्यक उपाय भी लागू किए जा रहे हैं। आगर-मालवा में 13 में से 12, अनूपपुर में 3 में से 3,छिंदवाड़ा में 5 में से 4, हरदा में 3 में से 3 प्रकरण रिकवर हो गए हैं। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में इंदौर, भोपाल और उज्जैन के अलावा कुल 1415 रोगी भर्ती किए गए। जिलों में करीब 21 हजार से अधिक रोगियों को आयसोलेट करने की व्यवस्था है। हालांकि इसका 13 प्रतिशत ही उपयोग में लेने की आवश्यकता पड़ी है। इसी तरह आईसीयू के लिए की गई व्यवस्था के मुकाबले जो आवश्यकता हुई वो उपयोग कुल व्यवस्था का 14 प्रतिशत है। इंदौर में कुल 3309 बिस्तर क्षमता के मुकाबले 1314 अर्थात 40 प्रतिशत का उपयोग हुआ। इसी तरह आईसीयू के लिए की गई व्यवस्था का 36 प्रतिशत उपयोग हुआ है। उज्जैन में कुल 1460 बिस्तर क्षमता का 16 प्रतिशत उपयोग हुआ है।

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प्रदेश में 1481 फीवर क्लीनिक संचालित हैं। अब तक फ्लू ओपीडी में कुल 34 हजार 753 मरीज आए और फ्लू ओपीडी में कुल 7622 सैम्पल लिए गए हैं। इनमें से 3217 प्रकरण रैफर किए गए। जन जागरूकता बढ़ने से नागरिकों द्वारा रोग की जानकारी छिपाने की बजाय परीक्षण और उपचार पर ध्यान दिया जा रहा है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन प्रदेश में किया जा रहा है। बैठक में जानकारी दी गई कि भोपाल में रोग नियंत्रण के लिए बहुआयामी प्रयास किए गए हैं। इससे रोग नियंत्रण में कामयाबी मिली है। भोपाल जिले में आईसीयू की व्यवस्था के तहत 156 के मुकाबले 28 रोगियों को सुविधा उपलब्ध करवाई गई। भोपाल में एम्स, जीएमसी, चिरायु मेडिकल कॉलेज और कोविड केयर सेंटर में कुल 492 रोगी भर्ती हैं। अभी 3 रोगी वेंटीलेटर पर हैं। भोपाल जिले में आयसोलेशन के लिए 1030 लोगों की व्यवस्था के मुकाबले 464 लोगों को आयसोलेट किया गया। कमिश्नर भोपाल ने बताया कि संभाग में भी कोरोना नियंत्रण की स्थिति में सुधार है, लेकिन सतर्कता के स्तर पर सभी सक्रिय हैं।

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कलेक्टर भोपाल ने वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से जानकारी दी कि जहांगीराबाद क्षेत्र में रमजान के बाद भी स्थानीय नागरिकों का पूरा सहयोग मिला। पॉजिटिव रोगी की जानकारी मिलने पर रोगी के उपचार और पॉजिटिव रोगी के फर्स्ट कांटेक्ट में रहने वाले लोगों को क्वारेंटाइन में भेजे जाने के कार्य में सहयोग दिया गया है। शहर के अशोका गार्डन, बाग उमराव दुल्हा जैसे क्षेत्रों में सघन बसाहट के कारण प्रकरण जरूर सामने आए थे, लेकिन अब स्थिति नियंत्रित हो रही है। कलेक्टर भोपाल ने बताया कि 1241 प्रकरणों में 788 रिकवर हुए हैं। रोगियों में 20 से 60 वर्ष की आयु के रोगी अधिक हैं। रोगियों में 60 वर्ष से अधिक आयु के रोगियों की संख्या कम हैं। वरिष्ठ नागरिकों को घरों में रहने के परामर्श पर परिवारों द्वारा ध्यान दिया जा रहा है। भोपाल जिला प्रशासन ने रोग की स्थिति की सतत समीक्षा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग भी किया है। भोपाल में 59 फीवर क्लीनिक संचालित हैं। कुल 32 थाना क्षेत्रों में 173 कंटेनमेंट क्षेत्र बनाए गए। सैम्पलिंग का काम निरंतर किया गया है। विशिष्ट रूप से सब्जी विक्रेता कैरियर न बनें इस पर भी ध्यान दिया गया है। सेवा भारती, जन अभियान परिषद और गैस पीड़ित क्षेत्रों के स्वैच्छिक संगठन कार्य कर रहे हैं।

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मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश के किसानों से गेहूँ खरीदने का कार्य पूर्णता की ओर है। अब तक 14 लाख 82 हजार किसानों से 113 लाख 47 हजार मीट्रिक टन गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। किसानों का गेहूँ खरीदने के लिए एस.एम.एस. भेजने की व्यवस्था का आवश्यकतानुसार आगे भी उपयोग किया जाएगा। अधिकांश जिलों में खरीदी लगभग पूर्ण हो गई है। इसके अलावा शेष जिलों के उन किसानों से जिन्होंने गेहूँ नहीं बेचा है, गेहूँ खरीदने की व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश में 23 मई को एक दिन में 20 हजार 643 किसानों से 2 लाख 63 हजार मेट्रिक टन गेहूँ उपार्जित किया गया। मुख्यमंत्री चौहान ने आज मंत्रालय से वीडियो कान्फ्रेंसिंग द्वारा प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की अद्यतन जानकारी प्राप्त की। प्रमुख सचिव खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण  शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि 24 मई तक किसानों से उपार्जित गेहूँ में से 94.78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का सुरक्षित परिवहन कर गोदामों में भंडारण कर लिया गया है। यह कुल उपार्जित गेहूँ का 84 प्रतिशत है। श्री शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में 124 लाख मीट्रिक टन गेहूँ उपार्जन का अनुमान है। भंडारण के लिए गोदामों में 119 लाख मीट्रिक टन क्षमता उपलब्ध है। इसके अलावा 8 लाख मीट्रिक टन सायलो उपलब्ध है। करीब 11 लाख किसानों के खातों में 13 हजार 127 करोड़ की राशि जमा करवा दी गई है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 26 मई तक उपार्जन तिथि निर्धारित की गई थी। आधे से अधिक जिलों में खरीदी कार्य लगभग पूरा हो गया है। वही वीडियो कान्फ्रेंस में मुख्यमंत्री चौहान ने बारदाना व्यवस्था और उपार्जन कार्य में सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के संबंध में भी जानकारी प्राप्त की। बैठक में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस उपस्थित थे।

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