जिस चीनी नेता को ढूंढ़ रहे थे ट्रंप, वो मोदी के साथ घूमता नजर आया

By अभिनय आकाश | Sep 04, 2025

एक तस्वीर ने अमेरिका समेत पूरे यूरोप को हिला दिया है। एक तस्वीर में पीएम मोदी के साथ जो शख्स नजर आया उसकी ताकत का अंदाजा डोनाल्ड ट्रंप और बाकी यूरोपीय देशों को अच्छे से है। तभी तो पीएम मोदी की इस शख्स से मुलाकात के बाद यूरोप का बयान आया है कि अगर अमेरिका ने भारत की अनदेखी जारी रखी तो अमेरिका भी हार जाएगा और पश्चिमी देश भी हार जाएंगे। आपको बता दें कि पीएम मोदी के साथ जो शख्स नजर आया उससे मिलने के लिए एक वक्त पर डोनाल्ड ट्रंप भी बेताब थे। लेकिन वो नहीं मिल पाए। दरअसल, पीएम मोदी ने एससीओ समिट के दौरान चीन के एक बेहद ही ताकतवर नेता काय ची से मुलाकात की। आप काई ची को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की परछाई कह सकते हैं। शी जिनपिंग ने खुद पीएम मोदी से मुलाकात करने के बाद काई ची को पीएम मोदी से मिलवाया। 

इसे भी पढ़ें: भारत का नाम ले रहे थे शहबाज, तभी पाक PM के कान में ये क्या बोल गए पुतिन

बताया जाता है कि काई ची दुनियाभर में चीन के द्वारा चलाए जाने वाले प्रोपोगैंडा विंग के कर्ताधर्ता है। चीन दुनियाभर के देशों के खिलाफ जो नैरेटिव वॉर चलाता है। उसे काई ची ही देखते हैं। भारत के खिलाफ भी चीन जो नैरेटिव वॉर चलाया है। उसमें भी काफी हद तक काई ची का हाथ हो सकता है। लेकिन अब काई ची का पीएम मोदी से मिलना एक बहुत बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। आने वाले दिनों में आपको शायद भारत के खिलाफ आपको चीन का ज्यादा प्रोपोगैंडा नहीं दिखेगा। चीनी मीडिया में भी अचानक पीएम मोदी और भारत की तारीफें होने लगी हैं। इसके लिए काई ची ही जिम्मेदार हो सकते हैं। 

इसे भी पढ़ें: Trump ने भले ही आर्ट ऑफ डील लिखी हो, लेकिन Art of War तो चीन का 2500 साल पुराना स्टाइल है, ये एक बार फिर दुनिया को बताया

आप काई ची की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य कभी भी शी जिनपिंग के साथ विदेशी यात्राओं पर नहीं जाते। लेकिन काई ची वो पहले शख्स हैं जिन्हें जिनपिंग अपने साथ विदेश लेकर गए। 2003 में तो शी जिनपिंग जब जो बाइडेन से मिलने गए तो अपने साथ काई ची को ले गए। पुतिन के साथ मुलाकात में भी काई ची को लेकर गए। अब शी जिनपिंग के कहने पर काई ची ने पीएम मोदी से मुलाकात की है। जनवरी 202 में जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद की शपथ ले रहे थे। उस समय अमेरिका चाहता था कि शी जिनपिंग और काई ची शपथग्रहण समारोह में आए। लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। डोनाल्ड ट्रंप भी जानते हैं कि काई ची की चीन में क्या ताकत है। शी जिनपिंग जो फैसले लेते हैं उन्हें लागू कराने का काम काई ची का ही है। 

प्रमुख खबरें

UP मंत्री Yogendra Upadhyay के बयान से बवाल, Johny Johny पर छिड़ी Culture की बड़ी बहस

Diesel का क्रेज खत्म? SUV Market में अब भी बादशाहत, लेकिन BS-7 Norms से बढ़ेगी चुनौती

भारत में Fuel Crisis का खतरा! 10 साल के निचले स्तर पर तेल भंडार, Pakistan समेत कई एशियाई देश संकट में

Tamil Nadu में टूटा दशकों पुराना Protocol, CM Vijay की शपथ में बजावंदे मातरम, CPI हुई नाराज