By रेनू तिवारी | Nov 03, 2026
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता चिरंजीवी ने अपने अभिनेता पुत्र रामचरण के साथ नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से एक उच्च स्तरीय मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य फिल्म उद्योग पर मंडराते कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) और 'डीपफेक' (Deepfake) तकनीकों के दुरुपयोग के गंभीर खतरों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था। डिजिटल युग में तेजी से विकसित हो रही इन तकनीकों के कारण कलाकारों के व्यक्तित्व अधिकारों, उनकी गोपनीयता और पेशेवर गरिमा पर खड़े हो रहे सवालों को लेकर चिरंजीवी ने केंद्र सरकार के सामने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
बैठक के मुख्य बिंदु और सरकार का रुख
चिरंजीवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा कर इस महत्वपूर्ण मुलाकात के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी चिंताओं को बेहद संवेदनशीलता और गंभीरता से सुना।
बैठक के दौरान हुए मुख्य विचार-विमर्श निम्नलिखित हैं:
तत्काल विचार का आश्वासन: गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस मामले पर त्वरित कदम उठाएगी और एआई व डीपफेक के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े सुरक्षा मानक (Safety Standards) तैयार करेगी।
लिखित ज्ञापन (Formal Representation): गृह मंत्री ने चिरंजीवी को इस विषय पर एक विस्तृत और औपचारिक लिखित ज्ञापन सौंपने की सलाह दी, ताकि कानूनी व तकनीकी पहलुओं का सटीक आकलन किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी को समन्वय का जिम्मा: मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्री ने केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी को फिल्म उद्योग और सरकार के बीच इस मुद्दे पर निरंतर समन्वय (Coordination) स्थापित करने का निर्देश दिया।
सिनेमा जगत और कलाकारों के अधिकारों के लिए क्यों आवश्यक है यह कदम?
आधुनिक तकनीकों के विकास से जहां रचनात्मकता के नए रास्ते खुले हैं, वहीं AI वॉइस क्लोनिंग, चेहरा बदलने की तकनीक (Face-Swapping) और बिना अनुमति तैयार किए जाने वाले डीपफेक कंटेंट ने कलाकारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिल्म जगत के लिए आशा की नई किरण
गृह मंत्री अमित शाह से मिले सकारात्मक आश्वासन के बाद चिरंजीवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार की यह प्रतिक्रिया पूरे भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बेहद उत्साहवर्द्धक है। एआई और डीपफेक जैसे उभरते डिजिटल खतरों से सुरक्षा के लिए एक मजबूत नीतिगत और कानूनी ढांचा तैयार होना न केवल कलाकारों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि भारतीय मनोरंजन उद्योग के भविष्य को भी सुरक्षित और पारदर्शी बनाएगा।