By अमित मुखर्जी | Apr 04, 2022
वाराणसी। चैत्र नवरात्र के अष्टमी के दिन काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर 350 से वर्षों से भी पुरानी परंपरा टूट सकती हैं। दरअसल यहां राजा मान सिंह के समय से अष्ठमी के दिन नगर वधुओं द्वारा स्वरांजली और नृत्य प्रस्तुत किया जाता हैं। लेकिन जहा मंच बनता था वहां लकड़ी व्यपारियों ने अवैध कब्जा कर लिया हैं। जिसको लेकर आज नगर वधू धरने पर बैठ गयी। इनके साथ किन्नर समाज के लोग भी थे। बाबा मशान नाथ मंदिर में 6 अप्रैल से श्रृंगार उत्सव शुरू होगा।
नगरवधुओं ने मुख्यमंत्री योगी और प्रधानमंत्री मोदी से हाथों में तख्तियां लेकर गुहार लगाया हैं। महाश्मशान नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष चैनु प्रसाद ने बताया लकड़ी व्यपारी किसी भी कीमत पर हटने को तैयार नही हैं। राजा मान सिंह ने जब मसान नाथ का मंदिर बनवाया तो उस समय संगीत के लिये कलाकारों को स्वरांजली के लिए आमंत्रित किये थे। कोई श्मशान की वजह से नही आया। तब नगर वधुयों ने आमंत्रण स्वीकार किया। तभी से परंपरा चलती आ रही हैं।
नगरवधुयों की माने तो उनका कहना हैं कि समाज मे आज उनकी कोई जगह नही हैं। कही भी जाओ तो लोग गलत निगाह से ही देखते। बाबा का एक मात्र ऐसा दरबार हैं, जहा हम अपने अगले जन्म में इस नरक से मुक्ति की कामना करते हैं। सरकार को परंपरा को टूटने नही देना चाहिये।