By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026
नयी दिल्ली, चार अगस्त भारत ने एशिया के सबसे कम दिखाई देने वाले जानवर में से एक बादलदार तेंदुए (क्लाउडेड लेपर्ड) के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए उसके लिए संरक्षण कार्य योजना (सीएपी) शुरू की है। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह घोषणा हर साल चार अगस्त को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बादलदार तेंदुआ दिवस के अवसर पर की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐतिहासिक रूप से यह प्रजाति पूर्वोत्तर के वन क्षेत्रों में पाई जाती थी और 19वीं सदी में इसे अपेक्षाकृत आम माना जाता था, लेकिन 20वीं सदी में बड़े पैमाने पर वनों की कटाई और शिकार के कारण इसकी संख्या में भारी गिरावट आई। इसके अनुसार 1900 के दशक के अंत तक आशंका जताई जाने लगी थी कि भारत में कई प्राकृतिक क्षेत्रों से बादलदार तेंदुआ समाप्त हो चुका है। रिपोर्ट में कहा गया, आज बादलदार तेंदुए असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा तथा पश्चिम बंगाल के उत्तरी और बिहार के हिस्सों में छोटी और छिटपुट संख्या के रूप में मौजूद हैं... हालांकि, भारत में इस प्रजाति की कुल संख्या का अभी तक कोई विश्वसनीय अनुमान उपलब्ध नहीं है।
रिपोर्ट में बताया गया कि पूर्वोत्तर राज्यों के कई संरक्षित क्षेत्रों में यह प्रजाति मौजूद है, लेकिन इन क्षेत्रों के बाहर इसके संरक्षण पर अभी सीमित ध्यान दिया गया है। भारत में बादलदार तेंदुए को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध किया गया है, जिसके तहत इसे शिकार, व्यापार और उसे रखने से पूर्ण सुरक्षा प्राप्त है। बादलदार तेंदुआ संरक्षण कार्य योजना का एक प्रमुख हिस्सा पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 प्राथमिकता वाले संरक्षण परिदृश्यों की पहचान करना है।
इसमें कैमरा ट्रैप, प्रजाति उपस्थिति सर्वेक्षण, आनुवंशिक अध्ययन जैसी वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से मानकीकृत निगरानी की व्यवस्था भी की गई है, जिससे इस प्रजाति और उसके आवास की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। अधिकारी ने कहा, वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए, कार्य योजना समुदाय आधारित संरक्षण और टिकाऊ आजीविका सहायता को बढ़ावा देती है। साथ ही, इसके प्राकृतिक क्षेत्र वाले पड़ोसी देशों के साथ सीमा-पार सहयोग को भी प्रोत्साहित करती है, ताकि इस प्रजाति के संरक्षण के लिए समन्वित प्रयास किए जा सकें।