By अंकित सिंह | Jul 18, 2026
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गुलामी की मानसिकता को छोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्ची देशभक्ति सिर्फ़ अधिकारों के लिए नारे लगाने में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को पूरा करने में है। बुलंदशहर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोग अक्सर अपने अधिकारों की मांग तो करते हैं, लेकिन ऐसी मांगें कभी भी देश, समाज या संस्थानों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, एक अनुशासित शिक्षक जो समय पर शिक्षा पूरी करने के साथ-साथ अच्छे संस्कार भी देता है, वह नारों की तुलना में देश की कहीं अधिक सेवा करता है।
मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले के हालात की तुलना मौजूदा हालात से भी की। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कोई भी ज़िला ऐसा नहीं था जो दंगों से मुक्त हो। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटियां और महिलाएं, खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, सुरक्षित नहीं थीं। योगी के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई परिवारों को अपनी बेटियों को दूर के रिश्तेदारों के यहां रहने के लिए भेजना पड़ता था ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। उन्होंने आगे दावा किया कि व्यापारी घर से निकलते समय यह सोचते थे कि क्या वे शाम तक अपने परिवारों के पास सुरक्षित लौट पाएंगे।
योगी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हर ज़िले में माफिया का बोलबाला था और हर थाने में माफिया का कोई न कोई गुर्गा रंगदारी वसूलता था। उन्होंने दावा किया कि हर ज़िले में माफिया एक समानांतर सरकार की तरह काम करता था। हालात बदलने का दावा करते हुए योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में कोई कर्फ्यू, दंगे या कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है। बुलंदशहर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ज़िले में सब कुछ ठीक है।
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