By अभिनय आकाश | Mar 17, 2025
कर्नाटक सरकार द्वारा सरकारी अनुबंधों में मुसलमानों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने के कदम को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच सोमवार को फिर से टकराव हुआ। यह प्रावधान हाल ही में राज्य के बजट में शामिल किया गया है। भाजपा ने कांग्रेस पर असंवैधानिक, धर्म-आधारित आरक्षण में लिप्त होने का आरोप लगाया, जबकि सत्तारूढ़ दल ने पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को समर्थन देने के उद्देश्य से इस कदम का बचाव किया।
विपक्ष के नेता आर अशोक ने तर्क दिया कि धर्म आधारित आरक्षण संविधान का उल्लंघन करता है और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कभी भी धर्म आधारित अनुबंध प्रणाली नहीं रही है। इससे समुदायों के बीच टकराव ही पैदा होगा। उन्होंने सरकार पर शादी भाग्य और टीपू जयंती समारोह जैसी कल्याणकारी योजनाओं की आड़ में मुसलमानों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालावाड़ी नारायणस्वामी ने भी सरकार से इस फैसले को वापस लेने का आग्रह किया और इसे संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य बताया।