By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 14, 2026
कांग्रेस ने जाति जनगणना के मुद्दे पर शुक्रवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जातियों की सूची उपलब्ध नहीं कराए जाने और उत्तरदाताओं द्वारा बताए गए जवाब को उसी रूप में दर्ज किए जाने की व्यवस्था से सरकार की मंशा पर गंभीर संदेह पैदा होता है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों के साथ कोई चर्चा नहीं की गई। उनका कहना था कि यह उम्मीद की जा रही थी कि जाति संबंधी सवाल बिहार और तेलंगाना में किए गए जाति सर्वेक्षणों की तरह राज्यवार पहले से तैयार सूची के साथ पूछा जाएगा और उत्तर के अनुरूप उचित विकल्प पर केवल निशान लगाया जाएगा।
साथ ही, खरगे जी की मांग के अनुसार राजनीतिक दलों के साथ भी कोई चर्चा नहीं की गई है।’’ केंद्र ने शुक्रवार को जनसंख्या गणना के चरण के तहत उत्तरदाताओं से पूछे जाने वाले 40 सवालों को अधिसूचित किया। इनमें जाति और कोविड टीकाकरण की जगह से संबंधित सवाल भी शामिल हैं। इस महीने की शुरुआत में जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों में जनसंख्या गणना एक से 30 सितंबर तक होगी।
इसमें कहा गया है, ‘‘उपरोक्त जनगणना के संचालन के लिए घर-घर जनसंख्या गणना शुरू होने से ठीक पहले 17 से 31 अगस्त तक स्व-गणना का विकल्प उपलब्ध होगा।’’ देश के बाकी हिस्सों में जनसंख्या गणना अगले साल शुरू होगी। यह पहली बार होगा जब जनगणना के तहत जाति संबंधी विवरण एकत्र किए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि प्रश्नावली में जातियों की सूची दिए जाने की संभावना नहीं है और उत्तरदाताओं द्वारा बताए गए जवाब को उसी रूप में दर्ज किया जाएगा।
जाति जनगणना का निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पिछले साल 30 अप्रैल को लिया था।