By अंकित सिंह | Dec 16, 2025
केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद जेपी नड्डा ने मंगलवार को चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला और कहा कि चुनाव हारने के बाद पार्टी गलतफहमियां फैला रही है। चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान संसद के उच्च सदन को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि विपक्ष मतदाता सूचियों में घुसपैठियों का सवाल उठाते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन का विरोध नहीं कर रहा है। कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए जेपी नड्डा ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी एक ही परिवार द्वारा नियंत्रित एक ही पार्टी पर है।
उन्होंने सदन को बताया कि एक बात स्पष्ट है: विपक्ष स्वयं एसआईआर के खिलाफ नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या घुसपैठियों को मतदाता सूची में रहने दिया जाना चाहिए। सूचियों की पूरी तरह और निष्पक्ष रूप से सफाई होनी चाहिए। चुनाव परिणामों ने विपक्ष को स्पष्ट रूप से निराश किया है। केंद्रीय मंत्री ने एसआईआर प्रक्रिया को भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि इससे पहले यह प्रक्रिया कांग्रेस सरकारों के दौरान भी की गई थी।
उन्होंने कहा कि दशकों तक, चुनाव आयोग के कामकाज और देखरेख की जिम्मेदारी एक ही पार्टी के पास रही और वह पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रही। वह पार्टी एक ही परिवार की थी। उस समय चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठाया गया। उन्होंने आगे कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। यह 1952 से ही भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री रहते हुए 1952, 1957 और 1961 में चुनाव हुए थे। 1965 में लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री थे। 1983 में इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। 1987 और 1989 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। 1992 में पी.वी. नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे। 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे। 2004 में मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। अटल जी को छोड़कर, जब भी चुनाव हुए, प्रधानमंत्री कांग्रेस पार्टी से ही थे।