स्वास्थ्य ही नहीं अर्थव्यवस्था को भी तेजी से प्रभावित कर रहा है कोरोना

By योगेश कुमार गोयल | Mar 16, 2020

करीब एक माह पहले तक चीन सहित कुछ गिने-चुने देशों में कहर बरपा रहे कोरोना का आतंक कुछ ही दिनों के भीतर बड़ी तेजी से करीब सवा सौ देशों तक पहुंच गया है और पूरी दुनिया के लिए मुसीबत बन गया है। इससे सवा लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं, साढ़े चार हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसी कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अब इसे महामारी घोषित कर दिया गया है। संगठन के अध्यक्ष टैड्रॉस अधनोम का कहना है कि हमने कोरोना जैसी महामारी कभी नहीं देखी। दो महीने पहले ही संगठन द्वारा कोरोना को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया गया था और उसके कुछ दिन बाद इसे आतंकवाद से भी गंभीर बताया गया था। हालांकि 2003 में चीन से ही फैले सार्स और 2012 में मर्स के मामलों में मृत्यु दर क्रमशः दस और पैंतीस फीसदी के आसपास थी लेकिन सार्स के कारण दुनियाभर में केवल 774 मौतें ही हुई थीं। दूसरी ओर सार्स तथा मर्स के मुकाबले कोरोना (कोविड-19) के मामले में भले ही मृत्यु दर तीन फीसदी के ही करीब है लेकिन यह जिस तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है और अभी तक कई हजार मौतें भी हो चुकी हैं, उससे इस खतरे की गंभीरता को समझा जा सकता है। सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि बिल्कुल स्वस्थ दिखने वाले संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने वाले दूसरे लोगों में भी कोरोना तेजी से फैल रहा है।

कोरोना से संक्रमित होने के बाद व्यक्ति में इसके लक्षण उभरने में 5 से 14 दिनों तक का समय लगता है और यही कारण है कि संक्रमित लोगों के सम्पर्क में आने वाले लोगों को कम से कम 14 दिनों के लिए अलग रखा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी कभी कोरोना जैसी महामारियां उभरकर दुनिया के सामने आती हैं, लोगों में उनसे लड़ने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र विकसित नहीं होता। इसी कारण ऐसी महामारियां देखते ही देखते कुछ ही समय में बहुत बड़ा विनाश कर जाती हैं। हालांकि कई देशों में कोरोना के लिए वैक्सीन बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि अभी इसमें काफी लंबा समय लगेगा और तब तक कोरोना दुनियाभर में कितना कहर बरपाएगा, कह पाना मुश्किल है। सार्स का इलाज खोजने वाले प्रोफेसर यूएन क्वॉक यंग तो हाल ही में कह भी चुके हैं कि कोरोना पूरी दुनिया में फैल चुका है और कम से कम इस साल तो यह वायरस दुनिया से खत्म नहीं होगा।

विश्वभर में महामारी बनकर उभरे कोरोना के कारण एक ओर जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था को बहुत भारी नुकसान हो रहा है, वहीं करोड़ों छात्रों की पढ़ाई भी चौपट हो गई है। चीन के अलावा इटली, ईरान, जापान सहित कई देशों ने अपने वहां के स्कूलों को फिलहाल बंद कर दिया है। भारत में भी दिल्ली सहित कुछ जगहों पर प्राथमिक स्कूलों को 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में करीब 30 करोड़ छात्र अपने घरों में ही रहने को विवश हैं। चीन से बाहर कोरोना के बड़ी तेजी से फैलने और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ गया है। रेटिंग एजेंसी मूडीज के अनुसार जहां कोरोना के प्रकोप के कारण दुनियाभर में घरेलू मांग में कमी आएगी, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था पर भी इसका बुरा असर पड़ना तय है। हालांकि कोरोना पर नियंत्रण पाने के निकट भविष्य में दूर-दूर तक कोई आसार दिखाई नहीं देते, फिर भी मूडीज का कहना है कि यदि इस वायरस के प्रभाव को काबू में कर भी लिया गया, तब भी दूसरी तिमाही में इससे वैश्विक गतिविधियां प्रभावित होंगी। भारत के संदर्भ में ब्रिटेन की ब्रोकरेज कम्पनी ‘बार्कलेज’ का कहना है कि लोगों के एकांत में रहने जैसे निवारक उपायों के चलते यहां की आर्थिक वृद्धि दर में दो फीसदी तक की गिरावट हो सकती है।

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शुरूआत में भारत में मिले तीन कोरोना मरीजों के ठीक होने के बाद अब जिस प्रकार देशभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है, उससे देश में भी चिंता का माहौल बन गया है। इसी वजह से गत 11 मार्च को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल तथा न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने केन्द्र तथा दिल्ली सरकार से कोरोना वायरस से निपटने के लिए उचित तथा पर्याप्त उपायों की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर जवाब मांगा है। दूसरी ओर भारत में कोरोना का प्रसार रोकने के लिए सरकार द्वारा कड़े कदम उठाते हुए सभी देशों के वीजा निलंबित करते हुए राजनयिकों तथा कुछ विशेष लोगों के अलावा विदेशों से आने वाले तमाम लोगों के भारत में प्रवेश पर 15 अप्रैल तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा एडवाइजरी जारी करते हुए यह भी कहा गया है कि किसी भी देश से यात्रा करके भारत आए यात्री अपने स्तर पर अपनी जांच करें और सरकार द्वारा जारी की गई जरूरी हिदायतों पर गौर करें। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि जो लोग चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, जापान, इटली, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, ईरान, फ्रांस, स्पेन अथवा जर्मनी की यात्री करके लौटे हैं, वे स्वयं ही 14 दिनों के लिए अपने आप को अलग-थलग कर लें। प्रधानमंत्री के निर्देश के पश्चात् देशभर में कोरोना को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान भी शुरू कर दिया गया है ताकि लोग कोरोना संक्रमण को लेकर जागरूक हों और भारत में इस महामारी को फैलने से रोका जा सके।

पूरी दुनिया में इस समय करीब सवा लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, भारत में भले ही अब तक कोरोना अन्य देशों की भांति विकराल रूप धारण नहीं कर पाया है लेकिन इसका खतरा कम होने की बजाय जिस प्रकार लगातार बढ़ रहा है, उसकी अनदेखी किया जाना बेहद खतरनाक हो सकता है। इसी वजह से सरकार द्वारा तमाम जरूरी उपाय किए जा रहे हैं और सारी तैयारियों की पांच-छह स्तरों पर मॉनीटरिंग भी की जा रही है। एक ओर जहां चीन के अलावा इटली, ईरान, दक्षिण कोरिया, जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, स्विटजरलैंड, जर्मनी जैसे देश कोरोना वायरस के फैलाव और उससे होने वाली मौतों को रोकने में असफल सिद्ध हुए हैं, वहीं सवा अरब से अधिक आबादी वाले भारत में अब तक मिले करीब 80 मरीजों में से 80 फीसदी ऐसे हैं, जो विदेशों से कोरोना संक्रमित होकर भारत आए। इसलिए अभी तक इसे लेकर थोड़ी राहत जरूर महसूस की जा सकती है लेकिन जिस तेजी से कोरोना दुनियाभर में फैलता जा रहा है और लोगों की मौतों का आंकड़ा निरन्तर बढ़ रहा है, ऐसे में समय रहते सचेत होना समय की बड़ी मांग है।

हालांकि अधिकांश डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि कोरोना पीड़ित 6-10 फीसदी मरीज ही गंभीर रूप से बीमार होते हैं। तीन चौथाई मरीज उपचार के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं जबकि कुछ फीसदी लोगों को ही स्वस्थ होने में थोड़ा समय लगता है। दिल्ली स्थित एम्स के पल्मनरी मेडिसन विभाग के डॉ. करण मदान के मुताबिक ऐसा भी संभव है कि कुछ लोगों को कोरोना वायरस हुआ हो और वे अस्पताल जाए बगैर ही ठीक हो गए हों लेकिन फिर भी जिस प्रकार दुनियाभर में कोरोना का आतंक दिखाई दे रहा है और भारत में कोरोना संक्रमितों के मामले लगातार मिल रहे हैं, ऐसे में देश में सुरक्षा के तमाम जरूरी उपाय किया जाना बेहद जरूरी है। इसीलिए लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए बार-बार साबुन से हाथ धोने, भीड़भाड़ में जाने से बचने और हाथ मिलाने की बजाय एक-दूसरे को नमस्ते कहने पर जोर दिया जा रहा है। दरअसल विशाल जनसंख्या वाले भारत में इस दिशा में जरा-सी चूक भी बहुत भारी साबित हो सकती है। इसीलिए बेहद जरूरी है कि लोग स्वास्थ्य को लेकर जितनी जल्दी जागरूक होंगे, उतनी जल्दी कोरोना पर नियंत्रण पाने में सफलता मिल सकेगी। भारत में संक्रमण फैलने की स्थिति में उससे निपटने में सबसे बड़ी बाधा यहां फैलने वाला अफवाहों का बाजार बन सकता है क्योंकि हमारे यहां बहुत सारे लोग सही-गलत पहचानने में अपने विवेक और बुद्धि का इस्तेमाल करने के बजाय सोशल मीडिया पर फैलती अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं और खुद भी बिना सोचे-विचारे ऐसे संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं। इसलिए बेहद जरूरी है कि हर नागरिक अफवाहों से बचते हुए कोरोना संक्रमण से बचने के लिए तमाम जरूरी सावधानियां अपनाए। अगर हम जरूरी सावधानियां बरतें तो बहुत जल्द भारत को कोरोना के खतरे से बाहर निकालने में सक्षम हो सकते हैं।

-योगेश कुमार गोयल

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा तीन दशकों से समसामयिक विषयों पर लिख रहे हैं)

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