आर्थिक समीक्षा: कॉरपोरेट इंडिया का 'रियल एस्टेट' प्रेम बढ़ा, लेकिन जोखिम लेने से कतरा रही हैं कंपनियां

By रेनू तिवारी | Jan 29, 2026

संसद में पेश की गई आर्थिक समीक्षा ने भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के निवेश व्यवहार को लेकर एक चिंताजनक पैटर्न उजागर किया है। समीक्षा के अनुसार, भारतीय कंपनियों का झुकाव अचल संपत्तियों, विशेष रूप से रियल एस्टेट की ओर अधिक बढ़ गया है। हालांकि, जब बात लंबी अवधि के उच्च-जोखिम वाले निवेश (जैसे नई तकनीक और विनिर्माण) की आती है, तो कॉरपोरेट जगत अब भी सावधानी बरत रहा है।

दुनिया के विभिन्न हिस्सों के ऐतिहासिक उदाहरणों का हवाला देते हुए समीक्षा में कहा गया कि व्यापारिक नेताओं और कंपनियों ने केवल लाभ कमाने वाली इकाइयों के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय परियोजनाओं में संस्थागत भागीदारों के रूप में काम किया है। भारतीय निजी क्षेत्र को भी सामाजिक विश्वास और संस्थागत साख बनाने पर जोर देना होगा। समीक्षा के अनुसार, भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र एक ऐसे ‘मिश्रित क्षेत्र’ में काम करता है, जहां नियम और प्रवर्तन असमान हैं और बाजार अनुशासन की जगह अक्सर राजनीतिक मध्यस्थता ले लेती है।

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समीक्षा में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा गया, ‘‘लंबी अवधि के जोखिम उठाने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के प्रयासों में निवेश करने की इच्छा की कमी है। उत्पादकता बढ़ाने या बड़े पैमाने पर प्रतिस्पर्धा करने के बजाय अक्सर नियामक खामियों का फायदा उठाने, सुरक्षित मार्जिन और कंपनी विशिष्ट सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाती है।’’

इसमें आगे कहा गया कि जो कॉरपोरेट क्षेत्र अपने जोखिम को सरकार पर टाल देता है, वह बेहतर सरकारी क्षमता के लिए दबाव नहीं डालता, बल्कि अपने फायदे के लिए ‘विवेकपूर्ण शक्तियों’ की मांग करता है। यह विवेकाधिकार नियम-आधारित संस्थानों को कमजोर करता है।

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

आर्थिक समीक्षा ने चेतावनी दी है कि यदि कॉरपोरेट निवेश केवल अचल संपत्तियों तक सीमित रहता है, तो यह देश की दीर्घकालिक विकास दर (GDP Growth) और रोजगार सृजन को प्रभावित कर सकता है।

"टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए कॉरपोरेट जगत को 'एनिमल स्पिरिट' (Animal Spirit) दिखाने की जरूरत है, यानी उन्हें नए इनोवेशन और बड़े उद्योगों में जोखिम लेना होगा।"

सरकार की अपेक्षा

सरकार ने उम्मीद जताई है कि टैक्स सुधारों और 'पीएलआई' (PLI) जैसी योजनाओं के बाद अब निजी क्षेत्र को आगे आकर बुनियादी ढांचे और विनिर्माण में निवेश बढ़ाना चाहिए, ताकि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त कर सके। 

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