Weekend Marriage: युवाओं में देखने को मिल रहा वीकेंड मैरिज का क्रेज, बाकी शादियों से अलग हैं इसके नियम-कानून

By अनन्या मिश्रा | Apr 01, 2023

हमारे समाज में शादी को सबसे जरूरी माना जाता है। इसी कारण कई बार लोगों को न चाहते हुए भी परिवार या रिश्तेदारों के दबाव में आकर शादी करनी पड़ती है। आपने भी कई तरह की शादियों के बारे में सुना होगा। जिनमें कोर्ट मैरिज, अरेंज मैरिज, लव मैरिज और लव-कम-अरेंज मैरिज आदि शामिल है। आज हम आपको एक नई तरह की शादी के बारे में बताने जा रहे हैं। इस शादी का जापान में काफी चलन है। इस शादी को वीकेंड मैरिज कहा जाता है।

वीकेंड मैरिज

आपको बता दें कि वीकेंड मैरिज को सेपरेशन मैरिज भी कहा जाता है। जैसा कि इस शादी के नाम में ही इसका अर्थ भी छिपा हुआ है। इस शादी को करने वाले कपल्स केवल वीकेंड पर ही साथ में रहते हैं। बाकि के दिनों में वह अपनी मन-मर्जी के हिसाब से जिंदगी जीते हैं। इस शादी में कपल को एक-दूसरे की लाइफ में इंटरफेयर करने की जरूरत नहीं होती है। एक तरह से कह सकते हैं कि शादीशुदा होने के बाद भी आप सिंगल लोगों की तरह लाइफ जीते हैं।

पर्सनल स्पेस 

वीकेंड मैरिज में शादी के बाद आप हफ्ते के 5 दिन बिना अपने पार्टनर के दखलअंदाजी के जैसे चाहें वैसे रह सकते हैं। हालांकि बाकी शादियों या फिर लव रिलेशन की तरह इस शादी में पार्टनर से पर्सनल स्पेस मांगने की जरूरत नहीं पड़ती है। शादी के बाद भी कपल भूरपूर तरीके से अपनी आजादी को एंज्वॉय करते हैं।

केवल वींकेड पर बिताना है पार्टनर के साथ समय

जैसा कि वीकेंड में व्यक्ति पर काम का प्रेशर ज्यादा नहीं रहता है। ऐसे में पार्टनर के साथ बिताने वाला हर एक पल आपके लिए क्वालिटी टाइम होता है। इस तरह से आपसी मतभेद और विवाद होने के चांसेज भी कम होते हैं। क्योंकि जब आप अपने पार्टनर के साथ कम समस के लिए साथ होते हैं तो उस मूवमेंट को जमकर एंज्वॉय करते हैं।

करियर की रुकावट

शादी के बाद अधिकतर महिलाओं को परिवार या करियर में से किसी एक को चुनना पड़ता है। ऐसे में महिलाएं अक्सर अपने करियर से समझौता कर लेती हैं। लेकिन आपको बता दें कि वीकेंड मैरिज में आपके करियर में कोई रुकावट नहीं आती है। कपल एक साथ अपने करियर और रिश्ते को बेहतर तरीके से हैंडल कर पाते हैं।

वीकेंड मैरिज के नुकसान

हालांकि वीकेंड मैरिज के तमाम सारे फायदों के साथ इसके कुछ नुकसान भी हैं। इस शादी में महिलाओं और पुरुषों दोनों का आर्थिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि बच्चा होने के बाद महिलाओं का ज्यादा समय परवरिश में गुजरता है और पैरेंटिंग में उन्हें पति का सहयोग भी नहीं मिल पाता है।

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