Strait of Hormuz में गहराया संकट, US-Iran सैन्य तनाव के चलते तेल आपूर्ति पर मंडराया बड़ा खतरा

By Ankit Jaiswal | Jul 14, 2026

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में एक बार फिर तेज हलचल देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, लगातार तीसरे दिन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई है। इसी वजह से मंगलवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गईं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लगातार तीसरे दिन ईरान के ठिकानों पर कार्रवाई की। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने दो बड़े तेल टैंकरों को निशाना बनाया और कुवैत तथा बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला किया।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी घोषणा की है कि ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी फिर से लागू की जाएगी। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की भी बात कही गई है। इन बयानों के बाद निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो तेल की कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है। सिंगापुर स्थित ऊर्जा बाजार विश्लेषक जून गोह का कहना है कि बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त भंडार तेजी से घट रहा है। ऐसे में यदि हालात नहीं सुधरे तो कीमतों में अचानक बड़ी बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

उधर, जहाजों की निगरानी करने वाले मंच के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में पिछले सप्ताह की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अमेरिका के ऊर्जा विभाग का कहना है कि सैन्य सुरक्षा के बीच तेल की आपूर्ति जारी है और जलमार्ग पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर समुद्री रास्ते से होने वाली तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और ईंधन की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हालात किस दिशा में जाते हैं, उसी के आधार पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की अगली चाल तय होगी।

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