By संतोष उत्सुक | Jul 14, 2026
कोई माने या न माने मगर ईश्वर ही सब तय करते हैं। अब तो यह भी स्वीकृत है कि ईश्वर राजनीति में हिस्सा ले रहे हैं। चुनाव जीतने के बाद चारों नहीं सभी दिशाओं में खुशियां, विदेशी वस्त्र पहन कर नाच रही होती हैं। दो या तीन या चार पार्टियां मिलकर आराम से बहुमत पका लेती हैं। आपसी नैतिक सहयोग का ज़माना है। अकेले कुछ करना मुश्किल सा होता जा रहा है तभी तो थोडा बहुत इनकार, रार और तकरार के बाद मिलन उत्सव आयोजित हो जाता है जिसमें ईश्वर का सामूहिक आशीर्वाद ले लिया जाता है।
ऊंची कुर्सी संभालते ही सार्वजनिक घोषणा की जाती है कि जल्दी ही ईश्वर से मिलने जाएंगे और धन्यवाद कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। उनके साथ नया मिला, ताज़ा लाव लश्कर भी जाता है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार ईश्वर से मिलकर कहेंगे आशीर्वाद लेने बहुत दिनों बाद आ पाया । उनका ही काम कर रहा था। मस्तिष्क से प्रणाम कर धन्यवाद करते हैं और एक बार फिर से ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त कर लेते हैं। मीडिया से बार बार हाथ मिलाकर पुष्टि करते हैं कि ईश्वर ही सब तय करता है। सूचित करते हैं कि चुनाव से पहले किए गए वायदों को पूरा करने के लिए उचित योजनाएं बनाने के लिए, आज हम ईश्वर से आशीर्वाद लेने आए हैं । फिर दोनों बाहें खोलकर आम लोगों का आह्वान करेंगे कि समाज में बदलाव लाने वाले महापुरुषों के पदचिन्हों पर चलें। धर्म के रास्ते पर चलने का आग्रह करेंगे फिर विजेता की तरह मुस्कुराते हुए घोषणा करेंगे, ईश्वर ने आज शुभ मुहर्त में विशेष आशीर्वाद दिया है।
यह प्रशंसनीय, रहस्यात्मक और दिलचस्प है कि नेताओं को ईश्वर की तरफ से अनेक संकेत मिलते हैं। उनकी अंतरात्मा से प्रेरित शक्ति ही पूरी सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कार्यवाही का संचालन करती है। ईश्वरीय आशीर्वाद से प्रेरित होकर अपनी आन, बान और शान बढाने के लिए योजनाएं बनाते हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सब कुछ और हर कुछ में आपसी सदभाव, प्रेम, इंसानियत, नफरत, पक्षपात, स्वार्थ और जातपात शामिल है। इत्तफाक से सामाजिक नायक इन सब मामलों में सफल रहते हैं। बेचारा आम आदमी तो हमेशा मानता ही है कि दुनिया में सब कुछ और हर कुछ ईश्वर की कृपा से होता है। ईश्वर ही सब कुछ तय करते हैं।
- संतोष उत्सुक