By रेनू तिवारी | Apr 20, 2026
वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर गहरे संकट की चपेट में है। रविवार को शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार शुरू होते ही कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। इसका मुख्य कारण ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के चलते रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही का रुकना है। यह फारस की खाड़ी का वह महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत अहम माना जाता है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज में कारोबार शुरू होने के बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 6.4 प्रतिशत बढ़कर 87.88 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.5 प्रतिशत बढ़कर 96.25 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। बाजार की यह प्रतिक्रिया पिछले दो दिनों से इस जलमार्ग को लेकर बनती-बिगड़ती उम्मीदों के बीच आई। ईरान ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि वह अपने तट के पास से वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह खोल देगा, जिसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में नौ प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी।
ईरान इस मार्ग पर प्रभावी नियंत्रण रखता है। हालांकि, शनिवार को तेहरान ने अपना फैसला वापस ले लिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी। अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध अब आठवें सप्ताह में है। इस युद्ध ने दशकों में सबसे भीषण वैश्विक ऊर्जा संकटों में से एक को जन्म दिया है। एशिया और यूरोप के वे देश जो पश्चिम एशिया से अपने तेल के एक बड़े हिस्से का आयात करते हैं, आपूर्ति रुकने और उत्पादन में कटौती से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि पेट्रोल की कीमतें अगले साल ही कुछ राहत दे सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद से लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जो बाद में बढ़कर 119 अमेरिकी डॉलर से भी अधिक हो गई। शुक्रवार को अमेरिकी कच्चा तेल 82.59 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 90.38 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर भाव पर बंद हुआ।