By अनन्या मिश्रा | Sep 26, 2026
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में उल्टे-सीधे खानपान के कारण हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। अक्सर हम सभी अपनी सेहत को सुधारने के लिए आयरन, कैल्शियम और विटामिन डी पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन एक बेहद जरूरी पोषक तत्व को नजरअंदाज कर देते हैं। वह पोषक तत्व ओमेगा 3 फैटी एसिड है। यह एक ऐसा जरूरी फैटी एसिड है, जो हमारे हार्ट, स्किन और दिमाग की देखभाल करता है।
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ओमेगा 3 फैटी एसिड आपके हार्ट का सच्चा दोस्त होता है। यह बॉडी में ट्राइग्लिसराइड्स के लेवल को कम करता है। इसके अलावा यह बीपी को कंट्रोल करने और आर्टरीज की सूजन को कम करने में मददगार होता है। इसके रोजाना सेवन से दिल की बीमारियों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
डीएचए हमारे दिमाग की कोशिकाओं का एक अहम और जरूरी हिस्सा है। ओमेगा 3 के सेवन से फोकस, ब्रेन फंक्शन और याददाश्त बेहतर होती है। बच्चों के विकास से लेकर ढलती उम्र में याददाश्त को बेहतर रखने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ओमेगा 3 में नेचुरल रूप से एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति गठिया या जोड़ों के दर्द से परेशान है, तो यह सप्लीमेंट आपको फायदा पहुंचा सकता है। इसको रोजाना लेने से शरीर की सूजन के साथ-साथ जोड़ों की अकड़न भी दूर होती है।
अगर आपकी स्किन भी बेजान, रूखी या समय से पहले बूढ़ी नजर आने लगी है, तो ओमेगा 3 आपके लिए मददगार साबित हो सकता है। यह स्किन की नमी को बनाए रखने, मुहांसों की सूजन कम करने और स्किन पर आने वाली फाइन लाइन्स की रफ्तार को धीमा रखता है। साथ ही इसके सेवन से आपकी स्किन जवां बनी रहती है।
ओमेगा-3 का घटक डीएचए हमारी आंखों के रेटिना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। शरीर में इसकी कमी होने से नजर से जुड़ी परेशानी या ड्राई आई की समस्या हो सकती है। यह सप्लीमेंट बढ़ती उम्र के साथ होने वाली मैक्युलर समस्याओं के खतरे को कम करने और आंखों की नमी बनाए रखने में सहायक होती है।
यह फिजिकल हेल्थ के साथ-साथ मेंटल हेल्थ का भी ख्याल रखता है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि ओमेगा 3 मूड को स्थिर रखने में सहायक होता है। इसके सेवन से एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसे लक्षण कम होते हैं।
प्रेग्नेंसी के समय डीएचए गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग और आंखों के विकास के लिए जरूरी होता है। लेकिन प्रेग्नेंट महिलाएं कोई भी सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
बता दें कि हर इंसान के शरीर की अलग-अलग जरूरत होती है। आमतौर पर ज्यादातर लोगों के लिए 250 से 500 mg EPA और DHA का मिला-जुला सेवन सही माना जाता है। लेकिन आपके लिए सही मात्रा क्या होगी, यह मौजूदा सेहत, उम्र और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।
ध्यार रहे कि इसको जरूरत से ज्यादा लेने पर पेट से जुड़ी परेशानियां और ब्लीडिंग की समस्या हो सकती है। इसलिए इसको डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।