Winston Churchill Death Anniversary: Nobel विजेता Winston Churchill का वो काला सच, जिसके कारण Bengal में 30 लाख लोगों ने तोड़ा दम

By अनन्या मिश्रा | Jan 24, 2026

ब्रिटेन के पूर्व प्राइम मिनिस्टर विंस्टन चर्चिल का आज ही के दिन यानी की 24 जनवरी को निधन हो गया था। बता दें कि साल 1942 में बंगाल में आई भुखमरी का जिम्मेदार विंस्टन चर्चिल को माना जाता है। भुखमरी की वजह से बंगाल में 30 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। लेकिन मॉर्डन ब्रिटेन में चर्चिल को हीरो की तरह देखा जाता है। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर विंस्टन चर्चिल के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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बंगाल में अकाल

उस दौर में बंगाल में अनाज का उत्पादन काफी अच्छा था। तभी विश्व युद्ध में बर्मा पर जापान ने कब्जा कर लिया था, जिस कारण वहां से चावल का आयात रुक गया था। यह देखते हुए ब्रिटिश आर्मी ने चर्चिल के आदेश पर अपने लिए चावल की जमाखोरी कर ली थी। इस दौरान जनता भरपेट एक वक्त पर खाने के बाद भी अनाज नहीं बचा पा रही है, ऐसे में ब्रिटिश हूकुमत ने जनता को अपना ही चावल महंगे दामों में खरीदने या फिर मरने पर मजबूर कर लिया था। इसके साथ ही देश के इस हिस्से में अनाज की आपूर्ति भी बंद कर दी गई। क्योंकि अंग्रेजों को डर था कि अनाज जापानियों के हाथ न लग जाए।

बंगाल में अकाल पड़ने का एक कारण यह भी था कि ज्यादा धान उपजता देखकर ब्रिटिश शासकों ने अनाज उगाने पर रोक लगा दी। धान की जगह किसानों को अफीम और नील की खेती करने को कहा गया। इसको निर्यात करके अंग्रेज मोटी रकम पाते थे। इस कारण भी खाद्यान का उत्पादन एकदम से गिर गया। जबकि भंडार में रखा अनाज अंग्रेजों के पास जमा हो गया था। इसी के नतीजन साल 1943 में बंगाल में भयंकर अकाल पड़ा।

चर्चिल की क्रूरता

जब लोग भूख से मरने लगे तो वह घास खाने पर मजबूर हो गए। हालांकि कुछ अधिकारियों ने बंगाल में लोगों को मरते देखकर मदद की बात की। जिस पर चर्चिल ने क्रूरता से कहा- उनको भारतीयों से नफरत है, वह गंदे लोग हैं और उनका धर्म भी क्रूरता से भरा है। बंगाल में भुखमरी की खबर दुनिया में फैलने लगी, तो बहुत से देशों ने मदद की पेशकश की। इस दौरान कनाडा और अमेरिका जैसे देश वहां चावल की भरपूर मात्रा भेजना चाहते थे, लेकिन चर्चिल ने मदद लेने से इंकार कर दिया। लेकिन चर्चिल नहीं चाहते थे कि भारतीय जिंदा बचे।

विंस्टन चर्चिल की खून की प्यास करीब 30 लाख से अधिक भारतीयों की मौत से भी शांत नहीं हुई। चर्चिल ने कहा था कि वह भारतीयों को गृहयुद्ध में मरता देखना चाहते हैं। भूतपूर्व ब्रिटिश पीएम चर्चिल को अश्वेत नस्लों से काफी नफरत थी। चर्चिल की अगुवाई में ही ब्रिटिश सेना ने एथेंस में नरसंहार किया था।

मृत्यु

सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल का 24 जनवरी 1965 को 90 साल की उम्र में निधन हो गया था।

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