Darul Uloom Deoband ने Gajwa-E-Hind के समर्थन में Fatwa जारी कर भारत के संविधान को सीधी चुनौती दी!

By नीरज कुमार दुबे | Feb 22, 2024

भारत में मजहब के नाम पर किस कदर पोंगापंथी लोग कोहराम मचाकर खुश होते हैं इसकी ताजा मिसाल उत्तर प्रदेश के देवबंद में स्थित दारुल उलूम है। हम आपको बता दें कि फतवों की दुकान चलाने वाले इस संस्थान ने अब जो फतवा जारी किया है उसमें 'गजवा-ए-हिंद' की बात कही गयी है। देखा जाये तो 'गजवा-ए-हिंद' "भारत पर आक्रमण के संदर्भ में शहादत" का महिमामंडन करता है। इसलिए सवाल उठता है कि दारुल उलूम भारत पर आक्रमण के लिए अपने छात्रों को क्यों उकसा रहा है? भारत को इस्लामिक देश में परिवर्तित करने के लिए पीएफआई और सिमी जैसे प्रतिबंधित संगठन जहां छिप कर मिशन 2047 चलाते हैं तो वहीं दारुल उलूम तो खुलकर 'गजवा-ए-हिंद' की बात कर रहा है। यह भी आश्चर्यजनक है कि अब तक सुनने में आता था कि आतंकवादियों की ओर से गजवा-ए-हिंद अभियान चलाया जा रहा है लेकिन अब खुद को शिक्षण संस्थान बताने वाले दारुल उलूम ने ही गजवा-ए-हिंद के समर्थन में फतवा जारी कर दिया है।

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देवबंद के मुल्ला-मौलवी वैसे तो अक्सर विवादित फतवे जारी करते हैं लेकिन इस बार उन्होंने जो किया है वह सीधे-सीधे देश के संविधान को चुनौती है। इसलिए कानून को चाहिए कि वह उसे चुनौती देने वाले को कतई ना बख्शे। देखा जाये तो देवबंद के मुल्ला-मौलवियों का हमेशा यही प्रयास रहता है कि भारतीय इस्लाम कभी उदार ना दिखे। यही कारण है कि जब अफगानिस्तान के लोकतंत्र को कुचल कर तालिबान ने सत्ता हथियाई तो दारुल उलूम ने खुशी जताई। यही कारण है कि जब कोई मुस्लिम महिला शिव भक्ति के गीत गा दे तो दारुल उलूम ने उसके खिलाफ फतवा जारी करने में देर नहीं लगाई। देखा जाये तो हिंदुस्तान में गजवा-ए-हिंद का सपना पालने वालों से कभी भी देश प्रेम की उम्मीद नहीं की जा सकती है क्योंकि यह तो सिर्फ शासन चाहते हैं। इसके लिए प्रयास हो भी रहे हैं। वर्तमान में धर्मांतरण व लव जिहाद की घटनाएं उसी अभियान का हिस्सा हैं और गजवा-ए-हिन्द का सपना देखने वाले लोग जी-जान से उस मुहिम में लगे दिखाई दे रहे हैं। जो जिहादी ‘गजवा-ए-हिन्द’ यानि पूरे भारत को दीन के अधीन लाने के मुगालते में हैं उन्हें देखना चाहिए कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जिसमें मुसलमानों की जनसंख्या कई मुस्लिम राष्ट्रों से ज्यादा है। इन कट्टरपंथियों को देखना चाहिए कि हमारे यहां का मुसलमान अन्य देशों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और संरक्षित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां का शासन किसी संप्रदाय विशेष की पुस्तक के अनुसार नहीं, बल्कि भारत के संविधान के हिसाब से चलता है। 

बहरहाल, इसमें कोई दो राय नहीं कि दारुल उलूम देवबंद की वेबसाइट पर उपलब्ध फतवा बच्चों में अपने ही देश के खिलाफ नफरत की भावना को पनपा रहा है। ऐसी सामग्री से राष्ट्र के खिलाफ नफरत भड़क सकती है। इसलिए सरकार को इस मामले में जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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