By अभिनय आकाश | Mar 24, 2022
25 मार्च 1992 की वो तारीख, दर्शकों से भरा मेलबर्न का क्रिकेट स्टेजियम दर्शकों से भरा हुआ था। आखिर हो भी क्यों न क्रिकेट के वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला जो था। आमने सामने थे इंग्लैंड और पाकिस्तान और धड़कनों का था इम्तिहान। इस डे नाइट मुकाबले में पाकिस्तान के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। पचास ओवर के मुकाबले में पाकिस्तान की टीम ने 6 विकेट खोकर 249 रन बनाए और इंग्लिश टीम के सामने 250 रनों का लक्ष्य रखा। पाकिस्तान का ओपनिंग ऑर्डर बल्लेबाजी में कुछ खास नहीं कर सका था और जावेद मियादाद के साथ टीम के कप्तान ने 72 रन की पारी खेलते हुए एक सम्मानजनक स्कोर तक इसे पहुंचाया था। जवाब में इंग्लैंड की टीम 49.2 ओवर में महज 227 रन बना पाई और ऑल आउट हो गई। पाकिस्तान ने पहली दफा विश्व कप पर कब्जा जमा लिया। पाकिस्तान की इस जीत के नायक रहे टीम के कप्तान इमरान खान। इमरान के लिए वो विश्वकर जीतना इतना आसान नहीं था। सामने कई सारी चुनौतियां थी, लेकिन किस्मत और इंजमाम व अकरम जैसे सहयोगियों के साथ से उन्हें चमचमाती ट्रॉफी उठाने का अवसर प्राप्त हुआ। लेकिन इसके तीन दशक बाद एक बार फिर से 25 मार्च को इमरान खान सरकार का कड़ा इम्तिहान होना है।
क्रिकेट का पिच हो या कूटनीति पाकिस्तान को हमेशा भारत के सामने मुंह की खानी पड़ी है। इमरान खान खुद भी ये हार का स्वाद चख चुके हैं वो भी अपने विश्व कप विजय अभियान के दौरान ही। जब 1992 के वर्ल्ड कप मुकाबले में भारत ने इमरान की टीम को धूल चटाई थी। पाकिस्तान के वजीर ए आलम की कुर्सी पर काबिज होने के बाद भी उसके आंतकियों के पालन पोषण और भारत की सरजर्मी में इसका इस्तेमाल करने वाले मंसूबे को भी भारत ने कभी सर्जिकल स्ट्राइक तो कभी एयर स्ट्राइक के बलबूते पर करारा जवाब दिया है। इसके साथ-साथ कश्मीर से धारा 370 हटा दी गई। कश्मीर के मुद्दे से ही पाकिस्तानी नेताओं की दाल-रोटी चलती है।