Kathua से लेकर Kashmir Valley तक आतंक के खिलाफ चल रही निर्णायक कार्रवाई, गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

By नीरज कुमार दुबे | Jan 08, 2026

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उससे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। हम आपको बता दें कि कठुआ जिले के दुर्गम जंगलों से लेकर कश्मीर घाटी के शहरी इलाकों और राजौरी के वन क्षेत्रों तक, सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने समन्वित रणनीति के तहत अभियान तेज कर दिया है। इन कार्रवाइयों का स्पष्ट संकेत है कि गणतंत्र दिवस से पहले किसी भी आतंकी साजिश को नाकाम करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

इसे भी पढ़ें: Kathua Encounter | कठुआ के कहोग गांव में छिपे हैं जैश के 3 खूंखार आतंकी, तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर की फायरिंग

एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि घना जंगल, दुर्गम पहाड़ी इलाका और सीमित दृश्यता के बावजूद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाले रखा है। आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है और हवाई निगरानी भी की जा रही है। जम्मू जोन के आईजीपी भीम सेन तूती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि एसओजी लगातार आतंकवादियों से मुकाबला कर रही है और सीआरपीएफ की टीमें भी इस संयुक्त अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

हम आपको बता दें कि बुधवार शाम शुरू हुई इस मुठभेड़ में दोनों पक्षों के बीच एक घंटे से अधिक समय तक गोलीबारी चली थी। इस दौरान एक सुरक्षाकर्मी के पैर में गोली लगने की खबर है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मुठभेड़ में किसी आतंकी को नुकसान पहुंचा है या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि इलाके में दो से तीन आतंकवादियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना के आधार पर ही अभियान चलाया गया था। इसके अलावा, सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के तीन अलग-अलग समूहों की गतिविधियों की भी खबरें सामने आई हैं।

इसी बीच, कश्मीर घाटी में आतंकवाद के डिजिटल और वित्तीय नेटवर्क पर भी शिकंजा कसा गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस की खुफिया रोधी शाखा (सीआईके) ने साइबर आतंकी मामलों की जांच के तहत बुधवार को घाटी में 22 स्थानों पर छापेमारी की। इनमें श्रीनगर शहर के 15 ठिकाने शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई फर्जी ऑनलाइन खातों के खिलाफ की गई है, जिनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी और आतंकी वित्तपोषण को बढ़ावा देने में किया जा रहा था। पुलिस का मानना है कि आतंकवाद अब केवल हथियारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी उसे समर्थन मिल रहा है।

राजौरी जिले में भी एक बड़ी साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया। थानामंडी तहसील के दोरी माल क्षेत्र के कल्लर जंगल में सेना और पुलिस ने संयुक्त अभियान के दौरान एक संदिग्ध आईईडी बरामद की। खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किए गए इस ऑपरेशन में करीब चार किलोग्राम वजनी विस्फोटक उपकरण को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित विस्फोट के जरिए नष्ट कर दिया गया। मौके से खाली कारतूस भी मिले हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र को पूरी तरह साफ कर दिया गया है, लेकिन किसी अन्य खतरे की आशंका को देखते हुए तलाशी और गश्त जारी है।

हम आपको बता दें कि पिछले एक महीने से सेना, बीएसएफ, पुलिस और सीआरपीएफ लगातार सीमावर्ती इलाकों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। सांबा और कठुआ जिलों में अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ-साथ पंजाब से सटे क्षेत्रों में भी गश्त बढ़ा दी गई है। गणतंत्र दिवस से पहले ग्राम रक्षा गार्ड सहित बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र को अलर्ट पर रखा गया है। कुल मिलाकर, कठुआ की मुठभेड़, कश्मीर घाटी में साइबर नेटवर्क पर छापेमारी और राजौरी में आईईडी की बरामदगी यह दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अब जमीनी, डिजिटल और खुफिया—तीनों स्तरों पर एक साथ लड़ी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां किसी भी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही हैं।

प्रमुख खबरें

IPL 2026: केएल राहुल और नितीश राणा ने तोड़ा विराट-डिविलियर्स का पुराना रिकॉर्ड

Raghav Chadha का AAP पर बड़ा हमला, बोले- डर से नहीं, बल्कि घृणा से पार्टी छोड़ी

आसमान में सुरक्षा पर संकट? ATC के निजीकरण के खिलाफ AAI Engineers, मंत्री को लिखी चिट्ठी

IPL 2026: KL Rahul ने रचा कीर्तिमान, आईपीएल में 150 रनों की पारी खेलने वाले पहले भारतीय बने