कुछ न कहने पर इतनी सुर्खियां मिली दीपिका को, कुछ कहतीं तो क्या होता

By अनुराग गुप्ता | Jan 08, 2020

जेएनयू हिंसा के शिकार हुए छात्रों से मिलने के लिए अभिनेत्री दीपिका पादुकोण अचानक से जेएनयू कैंपस पहुंचीं। जहां पर उन्होंने छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष से मुलाकात की। मुलाकात के तुरंत बाद ही दीपिका पादुकोण सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं वो भी फोटो और वीडियो के जरिए... इस बीच हैशटैग भी ट्विटर पर ट्रैंड करने लगा... #BoycottChhapaak इस टैग के तुरंत बाद ही #ISupportDeepika भी चलने लगा... लेकिन किसी ने समझा इसके पीछे की वजह क्या रही होगी...

दीपिका पादुकोण को लेकर भी देश में अब दो गुट बन गए एक वह  जो उनका समर्थन कर रहा है तो दूसरा वह जो उनके विरोध में आ गया है। नेताओं के अलावा इस मामले में सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी बातें रखी कि क्यों वह उनका समर्थन या फिर विरोध कर रहे हैं। आज सवाल इसी मुद्दे को लेकर करेंगे...

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JNU में क्या दीपिका फोटो खिंचवाने गईं थीं ?

इस सवाल का जवाब तो दीपिका और उनकी पीआर टीम ही दे सकती हैं कि आखिर वह जेएनयू में अचानक से कैसे पहुंच गई। लेकिन बात उस समय बिगड़ी जब उन्होंने जेएनयू हिंसा में घायल हुए एक धड़े से मुलाकात की लेकिन दूसरे धड़े से मिलने की तस्वीरें कभी भी नहीं है। दूसरा धड़ा यानि की एबीवीपी... भईया देखे जेएनयू हिंसा में लेफ्ट और राइट दोनों के छात्र जख्मी हुए थे। आरोप दोनों ने एक-दूसरे पर लगाया था...व्हाट्सएप की जो चैट वायरल हो रही है उसमें दोनों धड़े समझ में आ रहे हैं। अब दोषी कौन है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा...

तो क्या सच में दीपिका ने छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाई ?

दीपिका पादुकोण ने एकजुटता दिखाई यह कह पाना मुश्किल है क्योंकि जब वह जेएनयू पहुंचीं तो वहां पर माकपा नेता सीताराम येचुरी और पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार लेफ्ट के छात्रों को संबोधित कर रहे थे। दीपिका इन लोगों की बातें सुनती रहीं... लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं... यह तो समझ आता है कि वह लेफ्ट को सपोर्ट करने गईं थीं। यह बताने गईं थी कि नकाबपोश गुंडों ने विश्वविद्यालय के अंदर जो कुछ भी किया वह गलत था लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं। और यह बात तो खुद छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष भी मानती हैं। तभी तो उन्होंने कहा कि जब आप उस पोज़िशन पर हैं तो आपको ज़रूर बोलना चाहिए।

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और हां एक बात और बता देते हैं जेएनयू छात्रों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए बॉलीवुड की कई नामी हस्तियों ने मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया पर प्रदर्शन किया था। उनमें अनुराग कश्यप, अनुभव सिन्हा, स्वानंद किरकिरे, दिया मिर्जा जैसे तमाम लोग शामिल थे। 

भईया आपको एक क्रोनोलॉजी समझा देते हैं। छात्रों के साथ जो कुछ भी हुआ वह गलत था क्योंकि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता है और इस हिंसा में कौन लोग जिम्मेदार हैं मने लेफ्ट या राइट उसकी तहकीकात तो पुलिस करके बता ही देगी। लेकिन फिल्म छपाक के रिलीज होने से पहले अचानक से दीपिका का जेएनयू पहुंचना बहुत बड़ा सवाल खड़ा करता है। इसे सोशल मीडिया यूजर्स सस्ता प्रमोशन भी बता रहे हैं।

ये मूवी वाला क्या मामला है ?

दीपिका पादुकोण की फिल्म छपाक इस हफ्ते रिलीज होने वाली है। यूजर्स ने कहा कि वह फिल्म का प्रमोशन करने के बहाने जेएनयू गईं थीं क्योंकि जेएनयू इन दिनों हाट टॉपिक है और वहां की कोई भी घटना हो उसे पूरा कवरेज मिल रहा है। इस तरफ से वह बिना कुछ किए देशभर के लोगों से रूबरू हो सकती हैं। लेकिन दूसरा पक्ष कहता है कि अगर यही बात होती तो फिर दीपिक की फिल्म के साथ अजय देवगन की फिल्म तानाजी और रजनीकांत की फिल्म भी रिलीज हो रही है तो फिर ये लोग भी तो जेएनयू जा सकते थे।

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भईया हमने आपको दोनों पक्ष बता दिया अब आप सोचो क्या सही है और क्या गलत। क्योंकि दीपिका अगर कुछ बोलीं होती जेएनयू में तो उनका इनटेन्शन साफ हो जाता। 

लेकिन आप लोगों को एक बात और बता देते हैं कि जिन-जिन मूवी को बायकॉट करने की बात हुई थी उन्होंने कमाई जबरदस्त की है। पदमावत, पीके और दंगल को देख लो। पदमावत ने कुछ 580 करोड़, पीके ने 850 तो दंगल ने  2000 करोड़ रुपए के आसपास की कमाई की है।

तो क्या जेएनयू जाना सोची समझी चाल थी ?

अब भईया इसका जवाब क्या दें हम... क्योंकि ट्विटर पर आपको हमने हैशटैग चलने वाली बात तो बता ही दी थी। तो ये भी सुन लो कि बॉयकॉट दीपिका से ज्यादा ट्वीट आईसपोर्टदीपिका पर हुए हैं। और अब तो दीपिका के समर्थन में पूरा बॉलीवुड उतर आया है। आप फोन उठाओ ट्विटर खोलकर ट्वीट देख लो। चलो हम अनुराग कश्यप की ही बात कर लेते हैं। इन तमाम स्टार्स और डॉयरेक्टर्स के अपने फॉलोवर होते हैं। ऐसे में कश्यप ने ट्वीट किया कि महिला हमेशा से ही ताकतवर थी, है और रहेगी। छपाक का पहले दिन सारे शो को उन सभी लोगों को टिकट बुक कराना चाहिए जो हिंसा के खिलाफ खड़े हैं। 

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चलिए मैं कहता हूं कि मैं जेएनयू में हुई हिंसा का विरोध कर रहा हूं लेकिन क्या मूवी नहीं देखूंगा तो मेरे विरोध को गलत कहा जाएगा। हां... इसको समझिए क्योंकि ये समझना बहुत आवश्यक है। और रही बात किसी मुद्दे की तो उसका सपोर्ट या विरोध मूवी के हिट होने या फ्लाप होने से तय नहीं किया जा सकता है। 

इसे तो देखने वाले ऐसे भी देख रहे हैं कि पहले किसी भी फिल्म को लेकर विरोध के स्वर तेज कर दो... वो कमाई खुद-ब-खुद करके दिखा देगी।

भईया ई सोशल मीडिया का मायाजाल है जितना घुसोगो उतना ज्यादा दलदल में फंसते जाओगे...

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