Deewana Movie Review | जानी-पहचानी शुरुआत पर इंटरवल का वो चौंकाने वाला ट्विस्ट, जो फिल्म को बनाता है खास

By रेनू तिवारी | Jun 20, 2026

'कल्कि' और 'शुभम' जैसी फिल्मों से दर्शकों और समीक्षकों के बीच अपनी खास पहचान बनाने वाले अभिनेता हर्षित रेड्डी ने एक बार फिर बड़े पर्दे पर वापसी की है। उनकी नई फिल्म 'दीवाना' (Deewana) आज, 20 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। श्रीकांत संगीशेट्टी द्वारा लिखित और निर्देशित यह फिल्म एक यूथफुल रोमांटिक एंटरटेनर है। प्रतिष्ठित डिस्ट्रीब्यूशन हाउस 'गीता आर्ट्स' द्वारा वितरित इस फिल्म को लेकर दर्शकों में इस कदर क्रेज था कि रिलीज़ से पहले ही इसके कई पेड प्रीमियर शो आयोजित किए गए थे। आइए जानते हैं कि एक प्यारी सी दिखने वाली यह यूथ लव स्टोरी बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

कहानी के केंद्र में है मुन्ना (हर्षित रेड्डी), जो एक आम बेफिक्र युवा है। वह अपनी जिम्मेदारियों से कोसों दूर अपने दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में समय बिताना पसंद करता है। मुन्ना की इस आसान और सुस्त जिंदगी में तब एक बड़ा मोड़ आता है, जब उसकी मुलाकात अम्मू यानी अमूल्या (स्नेहा मणिमेघलाई) से होती है। अम्मू के आने से मुन्ना की जिंदगी में रोमांस, हंसी-मजाक के पल और कॉलेज के विरोधी ग्रुप के साथ छोटी-मोटी लड़ाइयों का सिलसिला शुरू हो जाता है। मुन्ना के माता-पिता शेखर (नरेश) और माँ (झांसी) भी कहानी में एंट्री लेते हैं, जो मुन्ना के रवैये और फैसलों पर अपने-अपने अनोखे अंदाज में प्रतिक्रिया देते हैं। शुरुआत में यह फिल्म एक आम कैंपस लव स्टोरी की तरह आगे बढ़ती है, लेकिन ठीक इंटरवल पर एक ऐसा अप्रत्याशित और ज़बरदस्त ट्विस्ट आता है, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की होती। यहाँ से फिल्म पूरी तरह बदल जाती है और गहरे जज्बातों व पारिवारिक भावनाओं की ओर मुड़ जाती है।

अभिनय और परफ़ॉर्मेंस: मुख्य जोड़ी ने जीता दिल

 

हर्षित रेड्डी (मुन्ना): हर्षित ने इस किरदार को बेहद आत्मविश्वास के साथ निभाया है। बेफिक्र और आलसी युवा से लेकर एक जिम्मेदार प्रेमी बनने तक का उनका बदलाव उनकी आंखों और बॉडी लैंग्वेज में साफ झलकता है। उन्होंने तेलंगाना स्लैंग (स्थानीय लहजे) को बहुत ही स्वाभाविक तरीके से पकड़ा है, जो युवाओं से सीधा कनेक्ट करता है।


स्नेहा मणिमेघलाई (अम्मू): स्नेहा ने इस फिल्म से एक ज़बरदस्त और ताज़गी भरा डेब्यू किया है। वह फनी और इमोशनल, दोनों ही दृश्यों में कमाल का संतुलन रखती हैं। प्री-क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स में उनका अभिनय देखने लायक है, जहाँ उन्होंने बिना किसी लाउड ड्रामे या नकली आँसुओं के उस पल को बेहद ईमानदार और गहरा बना दिया है।

सपोर्टिंग कास्ट: पिता के रोल में अनुभवी अभिनेता नरेश का काम बेहद सधा हुआ है और वे बिना किसी शोर-शराबे के पारिवारिक दृश्यों को भारीपन देते हैं। माँ के रूप में झांसी ने अपनेपन और बेहतरीन कॉमिक व इमोशनल टाइमिंग से प्रभावित किया है। मुन्ना के दोस्त के रूप में विक्रांत ने फिल्म में गजब की एनर्जी भरी है। रोलर रघु और ज़बरदस्त वेणु का स्क्रीन टाइम भले ही कम हो, पर वे अपनी कॉमिक टाइमिंग से छाप छोड़ जाते हैं।

फिल्म के मजबूत पक्ष (Strengths)

'दीवाना' फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका अप्रत्याशित और चौंकाने वाला इंटरवल ट्विस्ट है। जहां पहला हिस्सा एक बेहद साधारण कॉलेज लव स्टोरी की तरह आगे बढ़ता है, वहीं मध्यांतर पर आने वाला मोड़ पूरी कहानी का रुख बदलकर इसे बेहद गंभीर और इमोशनल ड्रामा में तब्दील कर देता है। फिल्म का दूसरा हाफ मजबूत पारिवारिक भावनाओं और Gen Z (आज के दौर के युवाओं) की जिम्मेदारियों को बखूबी दर्शाता है, जो दर्शकों को गहराई से भावुक करने में सफल रहता है। इसके अलावा, मुख्य जोड़ी के रूप में हर्षित रेड्डी और स्नेहा मणिमेघलाई की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री कमाल की है। हर्षित ने बेफिक्र युवा से एक जिम्मेदार प्रेमी बनने के बदलाव को अपनी बॉडी लैंग्वेज से शानदार ढंग से दिखाया है, तो वहीं स्नेहा ने अपनी पहली ही फिल्म में बिना किसी लाउड ड्रामे या नकली आंसुओं के प्री-क्लाइमेक्स और क्लाइमेक्स के दृश्यों में बेहद परिपक्व और ईमानदार अभिनय किया है। तकनीकी मोर्चे पर, वामसी पचिपुुलुसु की खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी और ईश्वर चंद का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की भावनाओं को बहुत मजबूती देता है।


फिल्म के कमजोर पक्ष (Weaknesses)

फिल्म के कमजोर पक्षों की बात करें, तो इसकी शुरुआत काफी धीमी और घिसी-पिटी लगती है। फिल्म का पहला हाफ बेहद साधारण है, जिसमें कॉलेज के पुराने ढर्रे के लड़ाई-झगड़े, दोस्तों के साथ आवारागर्दी और गलतफहमियां दिखाई गई हैं, जो कई जगह पुरानी फिल्मों की याद दिलाती हैं और नयापन महसूस नहीं होने देतीं। इसके अलावा, कुछ दृश्यों में स्क्रीनप्ले की रफ़्तार इतनी धीमी हो जाती है कि कहानी खिंची हुई लगने लगती है। ऋषिकेश पसपाल की एडिटिंग पहले हाफ में थोड़ी ढीली रही है; अगर मुन्ना और उसके दोस्तों के कुछ आम दृश्यों को छोटा (ट्रिम) कर दिया जाता, तो फिल्म की गति और बेहतर हो सकती थी। साथ ही, सहायक कलाकारों में जीवन कुमार का अभिनय कुछ खास दृश्यों में जरूरत से ज्यादा लाउड और तेज आवाज वाला लगता है, जो फिल्म के बाकी किरदारों के स्वाभाविक लहजे के साथ पूरी तरह मेल नहीं खाता।

सिनेमाई विश्लेषण (Direction & Technical Analysis)

डायरेक्टर श्रीकांत संगीशेट्टी ने जानबूझकर फिल्म के पहले हाफ को हल्का-फुल्का और थोड़ा आम रखा है, ताकि दर्शक किरदारों की दुनिया से अच्छी तरह जुड़ सकें। लेकिन इंटरवल का टर्निंग पॉइंट कहानी को एक नया नज़रिया देता है और इमोशनल दूसरे हाफ की एक मजबूत नींव रखता है। डायरेक्टर ने 'Gen Z' (आज के युवा दर्शकों) की पसंद को ध्यान में रखते हुए कुछ बेहतरीन ट्विस्ट जोड़े हैं, जो लव स्टोरी की मूल आत्मा को खोने नहीं देते।

तकनीकी मोर्चे पर, वामसी पचिपुुलुसु की सिनेमैटोग्राफी शानदार है। वार्म टोन और साफ-सुथरे फ्रेम्स ने तेलंगाना के बैकड्रॉप को खूबसूरती से दिखाया है। संगीतकार ईश्वर चंद ने युवाओं को पसंद आने वाले गाने दिए हैं और उनका बैकग्राउंड स्कोर (BGM) विशेषकर दूसरे हाफ के इमोशनल दृश्यों को काफी मजबूती देता है। ऋषिकेश पसपाल की एडिटिंग ठीक है, हालांकि पहले हाफ के कुछ दृश्यों को ट्रिम किया जा सकता था।

'दीवाना' एक जानी-पहचानी प्रेम कहानी होने के बावजूद अपने साहसी ट्विस्ट, शानदार अभिनय और मजबूत पारिवारिक भावनाओं के संतुलन के कारण एक सफल और मुकम्मल फिल्म बनकर उभरती है। यह एक सकारात्मक, 'फील-गुड' सिनेमा है जो दर्शकों को एक उम्मीद भरे नोट पर छोड़कर जाता है।

रेटिंग: 3.5/5 स्टार्स (एक बार जरूर देखने लायक)

 

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