Delhi AQI 369 दर्ज, दिवाली से पहले शहर में छाई धुंध

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 07, 2026

(तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, सात नवंबर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 369 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। दिवाली की पूर्व संध्या पर शहर धूम कोहरा की आगोश में लिपटा रहा और दृश्यता कम हो गई। पूर्वानुमान के मुताबिक, रविवार को हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच सकती है।

दिवाली के जश्न, वाहनों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने के चरम मौसम के कारण प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। दिल्ली में प्रदूषण के आंकड़ों पर नजर रखने के लिए स्थापित 59 केंद्रों में से 16 पर शनिवार को हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि 29 केंद्रों पर यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी। सबसे खराब एक्यूआई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली के पास 452 दर्ज किया गया।

शहर का औसत एक्यूआई शुक्रवार के 382 से थोड़ा सुधरकर शनिवार को 369 हो गया, लेकिन ‘गंभीर’ श्रेणी की 400 की सीमा के करीब ही बना हुआ है। कई निगरानी केंद्रों पर यह स्तर पहले ही पार हो चुका है, जो पूरी राजधानी में हवा की गुणवत्ता के और खराब होने का संकेत देता है। दिल्ली में स्थापित ‘वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली’ (ईडब्ल्यूएस) के अनुसार, आठ और नौ नवंबर को हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने की आशंका है।

इसके बाद के छह दिनों के लिए अनुमान है कि हवा की गुणवत्ता मामूली उतार-चढ़ावा के साथ ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणियों में बनी रहेगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों के अनुसार, शून्य से 50 के बीच वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है। मौसम और वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों ने स्थिति के और बिगड़ने की आशंका जताते हुए कहा कि इसकी वजह प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां, दिवाली से जुड़े उत्सवों की शुरुआत, वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की चरम अवधि है।

प्रतिकूल मौसमी स्थितियां हालात को और बिगाड़ रही हैं। ईडब्ल्यूएस के अनुसार, 6,000 वर्ग मीटर प्रति सेकंड से कम का ‘वेंटिलेशन इंडेक्स’ और 10 किलोमीटर प्रति घंटे से कम की औसत हवा की गति, प्रदूषकों को प्रभावी ढंग से फैलने से रोक रही हैं। दिल्ली में शनिवार को पीएम10 सबसे प्रमुख प्रदूषक था।

दिल्ली के लिए ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ (डीएसएस) के अनुसार, शनिवार को शहर के प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक (21.4 प्रतिशत) रहा। पराली जलाने का योगदान 1.7 प्रतिशत आंका गया, और अनुमान है कि रविवार को यह बढ़कर 5.4 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों के मुताबिक, शुक्रवार को छह राज्यों में पराली जलाने की 589 घटनाएं हुई, जिनमें से 357 घटनाएं पंजाब में, नौ हरियाणा में, 23 उत्तर प्रदेश में, 58 राजस्थान में, तीन उत्तराखंड में और 139 मध्य प्रदेश में दर्ज की गईं।

आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से छह नवंबर के बीच छह राज्यों में पराली जलाने की कुल 6,226 घटनाएं दर्ज की गई हैं।

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