By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 07, 2026
नयी दिल्ली, सात नवंबर राष्ट्रमंडल खेल 2002 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच रहे गुरदयाल सिंह भंगू का कनाडा के सरे में निधन हो गया है। वह 86 साल के थे। हॉकी इंडिया ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘भारतीय हॉकी में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
उनके परिवार और प्रियजनों के प्रति हमारी हार्दिक संवेदनाएं।’’ भंगू का नाम भारतीय महिला हॉकी के इतिहास की सबसे यादगार जीतों में से एक के साथ हमेशा के लिए जुड़ा रहेगा। भारत ने उनके मार्गदर्शन में मैनचेस्टर में खेले गए फाइनल में इंग्लैंड को 3-2 से हराकर राष्ट्रमंडल खेलों का खिताब जीता। इस जीत ने देश के खेल जगत पर अमिट छाप छोड़ी।
इस रोमांचक मुकाबले का फैसला ममता खरब के अतिरिक्त समय में किए गए गोल ने किया। यह जीत बाद में खेल जगत में एक चर्चित घटना बन गई और 2007 में रिलीज हुई शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘चक दे इंडिया’ की कहानी का आधार बनी। लायलपुर (अब पाकिस्तान के फैसलाबाद) में जन्मे भंगू अंबाला में पले-बढ़े और विश्वविद्यालय स्तर पर हॉकी खेली।
बाद में उन्होंने पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान में कोचिंग का प्रशिक्षण लिया, जहां उन्हें हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यान चंद और ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता बालकिशन सिंह से सीखने का अवसर मिला। भारतीय महिला टीम का कोच बनने से पहले वह 1972 से 1976 के बीच नाइजीरिया की महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच भी रहे थे। उन्होंने 1998 में भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच का पद संभाला था।
भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें 2000 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।