By निधि अविनाश | Dec 28, 2020
कोरोना महामारी से न केवल स्कूल बंद हुए बल्कि इसका सबसे ज्यादा असर प्ले स्कूल पर पड़ा। बजट निजी स्कूल जो बहुत सस्ती लागत पर शिक्षा प्रदान करते हैं, आज इस कोरोना काल में संघर्ष कर रहे हैं। वहीं प्ले स्कूल की हालत बहुत खराब हो गई हैं क्योंकि टॉडलर को ऑनलाइन कक्षाएं देना संभव नहीं है। यहीं एक बड़ा कारण हैं कि मार्च के बाद से प्ले स्कूल को फीस के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है और न ही कोई नया एडमिशन हुआ है। यहां तक की प्ले स्कूल ऑपरेटर कोविड वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद इसमें कोई बदलाव नहीं देख पा रहे है।
यूनिसेफ ने मई में रिपोर्ट "प्री-स्कूलों और किंडरगार्टन पोस्ट-कोविड 19 की रिपोर्ट" रिपोर्ट कहती है, "प्राथमिक या माध्यमिक स्कूलों को फिर से खोलने के फैसले से पहले किंडरगार्टन को फिर से खोलने का निर्णय आ सकता है। प्री स्कूल से न केवल बच्चों बल्कि माता-पिता के काम पर वापस लौटने की क्षमता बढ़ेगी और छोटे बच्चों को तत्काल देखभाल की आवश्यकता होगी क्योंकि उनके माता-पिता काम पर लौट आएंगे।