By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 06, 2026
नयी दिल्ली, छह नवंबर दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को उस शिकायत को खारिज कर दिया, जिसमें दिल्ली सरकार के अधिकारियों की तुलना कथित तौर पर भगवान हनुमान से करने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया ‘धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने का जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादा जाहिर नहीं होता’। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने शिकायतकर्ता राम निवास शर्मा की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत दायर अर्जी खारिज कर दी।
यह प्रावधान किसी संज्ञेय अपराध के मामले में पुलिस थाने द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार किए जाने पर मजिस्ट्रेट को पुलिस जांच कराने और प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देने का अधिकार देता है। शिकायतकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया था। यह धारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों से संबंधित है।
शुक्रवार को दिए गए आदेश में अदालत ने उस भाषण का उल्लेख किया, जिससे कथित तौर पर शिकायतकर्ता की धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं। भाषण में कहा गया था, ‘‘ये जो हमारी दिल्ली सरकार के अधिकारी हैं, ये सारे हनुमान हैं। इन हनुमानों की जब पूंछ में आग लगती है, तब इन्हें अपनी सारी शक्तियां याद आती हैं, इससे पहले याद नहीं आती।
हनुमान जी मुझे इसलिए याद आए क्योंकि हम मरघट वाले बाबा के द्वार पर बैठे हैं।’’ दिल्ली पुलिस ने 15 अक्टूबर को एक स्थिति रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि मामला दर्ज करने का कोई आधार नहीं है, क्योंकि इसमें कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। जवाब में कहा गया था, ‘‘कोई संज्ञेय अपराध नहीं हुआ है और प्राथमिकी दर्ज करने का कोई आधार नहीं है।’’ इससे पहले, तीन अक्टूबर को अदालत ने कश्मीरी गेट पुलिस थाने के प्रभारी से स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, रेखा गुप्ता ने 23 सितंबर, 2025 को कश्मीरी गेट के पास आईएसबीटी पर एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी की थी।
यह कार्यक्रम दिल्ली से उत्तर प्रदेश के बड़ौत तक दिल्ली परिहवन निगम की बस सेवा शुरू करने के लिए आयोजित किया गया था।