By रेनू तिवारी | Jan 16, 2026
दिल्ली को अक्सर "अपराध की राजधानी" कहा जाता है, लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि इसके पीछे केवल अपराधों की संख्या ही नहीं, बल्कि कई भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक कारण भी हैं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक और उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। दिल्ली सरकार द्वारा जारी ‘दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका 2025’ के अनुसार, पिछले चार वर्षों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार और उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
राष्ट्रीय राजधानी में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में पिछले चार वर्षों में लगातार गिरावट सामने आई है, जिसमें 2021 और 2024 के बीच दर्ज मामलों की कुल संख्या में लगभग 12 प्रतिशत की कमी आयी है। ‘दिल्ली सांख्यिकी पुस्तिका 2025’ में यह जानकारी दी गई। आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में दुष्कर्म, दहेज हत्या, दुष्कर्म और छेड़छाड़ सहित महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों की कुल संख्या 5,208 थी। यह संख्या 2022 में मामूली रूप से घटकर 5,119 हो गई, जबकि 2023 में और कम होकर 4,982 रह गई तथा 2024 में तेजी से गिरकर 4,584 हो गई।
इन चार साल की अवधि में 2024 में महिला अपराध के सबसे कम मामले थे। छेड़छाड़ के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण गिरावट सामने आई और 2021 में दिल्ली में छेड़छाड़ के 2,551 मामले दर्ज किए गए, जो 2022 में घटकर 2,501 और 2023 में 2,345 रह गए जबकि 2024 में, यह आंकड़ा तेजी से गिरकर 2,037 हो गया, जो 2021 की तुलना में 20 प्रतिशत से ज्यादा की कमी को दर्शाता है।
दिल्ली पुलिस ने 2025 में 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत 1,000 से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया है। तकनीक का उपयोग, जैसे फेशियल रिकग्निशन और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, अपराध नियंत्रण में मदद कर रहे हैं। हालांकि, साइबर सुरक्षा और लापता महिलाओं की सुरक्षा पर अभी और कड़े प्रयासों की आवश्यकता है।