Stock Market Crash Reason | आज क्यों क्रैश हुआ शेयर बाजार? ये हैं गिरावट के 5 बड़े और डरावने कारण

By रेनू तिवारी | Mar 09, 2026

सोमवार को भारतीय शेयर मार्केट तेज़ी से नीचे खुले, जो तेल की बढ़ती कीमतों, मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और रुपये में भारी गिरावट की वजह से ग्लोबल बिकवाली को दिखाता है। शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 2,400 पॉइंट से ज़्यादा गिर गया, जबकि निफ्टी 50 700 पॉइंट से ज़्यादा गिरा, जो सभी सेक्टर में बड़े पैमाने पर बिकवाली को दिखाता है। यह तेज़ गिरावट तब आई जब ग्लोबल मार्केट गिरे और कच्चे तेल की कीमतें 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गईं। आखिर बाजार में अचानक यह 'ब्लडबाथ' क्यों आया? आइए जानते हैं वे 5 मुख्य कारण जिन्होंने मार्केट को पाताल में धकेल दिया:

मार्केट क्रैश का सबसे बड़ा और तत्काल कारण ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच युद्ध का भीषण होना है। ब्रेंट क्रूड 25% उछलकर $116 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। दुनिया के 20% तेल व्यापार का रास्ता 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) लगभग बंद हो गया है। इराक और कुवैत द्वारा उत्पादन में कटौती ने 'एनर्जी शॉक' के डर को हकीकत में बदल दिया है।

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भारत की कच्चे तेल पर भारी निर्भरता

भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के अनुसार, तेल की कीमतों में यह उछाल भारतीय GDP, करंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई के लिए 'डेथ वारंट' जैसा है। जब तेल महंगा होता है, तो पेट्रोल-डीजल से लेकर माल ढुलाई तक सब महंगा हो जाता है, जिससे पूरी इकॉनमी की रफ्तार सुस्त पड़ जाती है।

रुपया अपने सर्वकालिक निचले स्तर (Record Low) पर

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों के पलायन ने भारतीय रुपये की कमर तोड़ दी है। रुपया डॉलर के मुकाबले 46 पैसे गिरकर 92.28 पर आ गया है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण रुपया जल्द ही 93 प्रति डॉलर के स्तर को पार कर सकता है। कमजोर रुपया आयात को और महंगा बनाता है, जिससे बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया है।

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ग्लोबल मार्केट में मंदी की 'सुनामी'

भारतीय बाजार अकेले नहीं गिर रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया के बाजारों में कोहराम मचा है। सोमवार को एशियाई बाजारों का हाल बेहाल रहा:

जापान का निक्केई: 7% नीचे

साउथ कोरिया का कोस्पी: 7% नीचे

ताइवान मार्केट: 6% नीचे

जब ग्लोबल मार्केट गिरते हैं, तो निवेशक 'रिस्क-ऑफ' मोड में आ जाते हैं और भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा खींच लेते हैं।


FII की आक्रामक बिकवाली (Panic Selling)

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय बाजार से अपना बोरिया-बिस्तर समेट रहे हैं। अकेले पिछले शुक्रवार को ही FII ने ₹6,030 करोड़ के शेयर बेचे थे। एक्सपर्ट सुनील गुर्जर के अनुसार, निफ्टी ने अपना महत्वपूर्ण 200-दिन का मूविंग एवरेज (EMA) तोड़ दिया है, जो स्पष्ट रूप से एक लंबी मंदी (Bearish Trend) का संकेत है।

अब आगे क्या?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,850 एक बहुत ही महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल है। अगर बाजार इससे नीचे टिकता है, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अभी 'पकड़ो और देखो' (Wait and Watch) की नीति अपनाएं और किसी भी बड़े निवेश से पहले भू-राजनीतिक (Geopolitical) स्थितियों के शांत होने का इंतज़ार करें।

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