By अभिनय आकाश | Sep 21, 2026
दिल्ली ज़िला अदालतों के वकीलों ने सोमवार को न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। वे सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के नियम 167 के तहत विवादित ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए बदले गए सिस्टम का विरोध कर रहे थे। दिल्ली की सभी ज़िला अदालत बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमिटी के बैनर तले, वकीलों ने न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। वे न्यायिक मजिस्ट्रेटों से सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और अलग-अलग सरकारी विभागों के अधिकारियों को निपटारे का काम सौंपने के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे। 20 सितंबर को जारी एक सर्कुलर में, कोऑर्डिनेशन कमिटी ने कहा कि बदले हुए नियम 167 के अनुसार, जिस व्यक्ति का चालान काटा गया है, वह या तो चालान की रकम स्वीकार कर उसका भुगतान कर सकता है या फिर चालान जारी होने के 45 दिनों के भीतर तय अधिकारी के सामने दस्तावेज़ी सबूतों के साथ उसे चुनौती दे सकता है।
इसने न्यायिक मजिस्ट्रेटों से कार्यकारी और विभागीय अधिकारियों को न्यायिक कामकाज सौंपने के प्रस्ताव का भी विरोध किया। समिति ने न्यायिक कामकाज को कार्यकारी या प्रशासनिक कार्यों से अलग करने को लेकर चिंता जताई। समिति ने कहा कि किसी फैसले के खिलाफ अदालत में अपील करने के लिए 50 प्रतिशत रकम पहले जमा करने की अनिवार्य शर्त नागरिकों के लिए बाधा बन सकती है। 19 सितंबर को हुई बैठक के बाद, समन्वय समिति ने इन बदलावों के विरोध में 21 सितंबर को एक दिन के लिए काम से दूर रहने का सर्वसम्मति से फैसला किया। समन्वय समिति ने सदस्यों से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से विरोध में शामिल होने की अपील की और कहा कि इस कदम का मकसद न्यायिक कामकाज और न्याय तक पहुंच को लेकर अपनी चिंताओं को उजागर करना है। नई दिल्ली बार एसोसिएशन (NDBA) के सदस्य इंडिया गेट सर्कल पर जमा हुए और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मार्च निकाला।