By अभिनय आकाश | Apr 15, 2025
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि विचाराधीन कैदी की लंबी कैद ऐसे आतंकी मामलों में जमानत देने का आधार नहीं हो सकती, जिनका देशव्यापी प्रभाव हो और जिनका उद्देश्य देश की एकता को अस्थिर करना हो। न्यायमूर्ति नवीन चावला और शैलिंदर कौर की पीठ ने यह टिप्पणी की और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद से जुड़े आतंकी वित्तपोषण मामले में अलगाववादी नेता नईम अहमद खान को जमानत देने से इनकार कर दिया। आरोपी ने अपनी जमानत याचिका के खिलाफ निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि निकट भविष्य में मुकदमा समाप्त होने की संभावना नहीं है और हिरासत में बिताए गए समय को स्वतंत्रता के उसके मौलिक अधिकार के साथ संतुलित करने के लिए उसे जमानत दी जानी चाहिए।