Delhi High Court का अहम फैसला, आवारा जानवर सामने आने पर भी चालक लापरवाही से मुक्त नहीं

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 24, 2026

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि भारत में सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोगों में यातायात अनुशासन का पालन नहीं करने और नियमों का सख्ती से पालन करने से बचने की प्रवृत्ति है। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘अप्रत्याशित स्थिति’ के सिद्धांत का इस्तेमाल करके किसी चालक को लापरवाही के लिए दोषमुक्त नहीं किया जा सकता, भले ही सड़क पर कोई आवारा जानवर आ गया हो और वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया हो। अदालत ने कहा कि चालकों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे खतरों का पहले से अनुमान लगाएं और वाहन में सवार लोगों तथा सड़क का इस्तेमाल करने वाले अन्य लोगों को नुकसान से बचाने के लिए उचित सावधानी बरतें।

अदालत ने कहा कि इस मामले में खतरा किसी अन्य व्यक्ति के कारण नहीं, बल्कि एक आवारा पशु के अचानक सामने आ जाने से पैदा हुआ था। उसने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में भी चालकों को सतर्क रहना चाहिए और उचित सावधानी बरतनी चाहिए। न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने कहा, ‘‘दोनों ही स्थितियों में ‘अचानक पैदा हुए खतरे’ की स्थिति मौजूद होती है।’’ अदालत ने किसी अन्य व्यक्ति के आचरण से पैदा हुए खतरे और किसी पशु या प्राकृतिक कारण से उत्पन्न खतरे के बीच अंतर स्पष्ट किया।

अदालत ने कहा कि अचानक खतरे का सामना करने वाले व्यक्ति से सटीक निर्णय लेने या पूरी सूझबूझ दिखाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती, लेकिन जब खतरा किसी आवारा पशु या अन्य प्राकृतिक कारण से पैदा होता है, तो स्थिति अलग होती है। अदालत ने कहा, ‘‘सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोगों में यातायात नियमों का सख्ती से पालन नहीं करने की प्रवृत्ति है। इससे स्वाभाविक रूप से कई तरह की अप्रत्याशित स्थितियां पैदा होती हैं, जिनका सामना भारत में सड़क का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अक्सर करना पड़ता है।’’ अदालत ने कहा, ‘‘दुर्घटनाओं से बचने के लिए स्वाभाविक रूप से त्वरित कदम उठाने, लगातार सतर्क रहने और सूझबूझ बनाए रखने की जरूरत होती है।’’ इस मामले में दुर्घटना 28 मई 2014 को हुई थी।

संजय भाटी कार चला रहा था और गुप्ता पिछली सीट पर बैठे थे। कुत्ते को बचाने के लिए भाटी ने कार मोड़ी, जिससे वाहन डिवाइडर से टकरा गया। गुप्ता 22 अगस्त 2020 को अपनी मृत्यु तक कोमा में रहे।

बीमा कंपनी ने इस बात पर भी सवाल उठाया था कि गुप्ता कार में यात्री के रूप में सवार थे या खुद वाहन चला रहे थे।

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