By नीरज कुमार दुबे | Oct 01, 2026
सर्दियों की दस्तक के साथ दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के खिलाफ अब कार्रवाई का दायरा बेहद व्यापक कर दिया गया है। 1 अक्टूबर यानि आज से ‘पीयूसी नहीं, ईंधन नहीं’ व्यवस्था सख्ती से लागू कर दी गई है। यानी वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है तो पेट्रोल, डीजल और सीएनजी लेने में मुश्किल होगी। इसके साथ ही वाहन, उद्योग, पराली, सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों, यानि हर मोर्चे पर निगरानी और कार्रवाई तेज की जा रही है।
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साथ ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने दस वर्ष पुराने डीजल और 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों को जब्त कर कबाड़ में भेजने की कार्रवाई तेज करने को कहा है। बीएस-4 और उससे नीचे के मालवाहक वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रतिबंध की स्थिति की भी समीक्षा की गई है। एनसीआर से दिल्ली आने वाली अंतरराज्यीय बसों को भी विद्युत, सीएनजी और बीएस-6 जैसे स्वच्छ विकल्पों की ओर ले जाने की योजना पर काम हो रहा है। एनसीआर में डीजल ऑटो रिक्शा को 31 दिसंबर 2026 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रगति भी देखी गई है। वहीं उबर, ओला, डिलीवरी सेवाओं और ई-कॉमर्स कंपनियों के वाहनों की अचानक जांच कर यह देखा जाएगा कि उनके बेड़े कितनी तेजी से स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों में बदल रहे हैं।
इसके साथ ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पराली प्रबंधन योजनाओं की समीक्षा करते हुए आयोग ने इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। फसल विविधीकरण, सीधे बीज वाली धान तकनीक, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों और किसानों के बीच जागरूकता अभियान को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। साथ ही एनसीआर के पत्थर तोड़ने वाले संयंत्रों को निर्धारित प्रदूषण नियंत्रण मानकों का तत्काल पालन करना होगा। उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन करने वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर कानूनी और आर्थिक कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, सड़क की धूल और निर्माण गतिविधियों से पैदा होने वाले सूक्ष्म कणों पर नियंत्रण के लिए चिन्हित धूल वाले इलाकों में अतिरिक्त यांत्रिक सफाई मशीनें सर्दी शुरू होने से पहले लगाई जाएंगी। निर्माण एवं ध्वस्तीकरण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और डीजल जनरेटरों पर अचानक जांच भी जारी रहेगी।
दूसरी ओर, दिल्ली-एनसीआर के यातायात जाम वाले इलाकों की पहचान कर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान आधारित यातायात प्रबंधन और स्वचालित चालान व्यवस्था लागू करने की तैयारी भी चज रही है, ताकि जाम में बेवजह जल रहे ईंधन और उससे होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके।
उधर, पेट्रोल पंप कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच इस व्यवस्था को लेकर समर्थन दिखाई दिया। कई लोगों का कहना है कि सर्दियों से पहले ही प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। हालांकि पंप संचालकों ने चेताया है कि बिना स्पष्ट लिखित निर्देश के अचानक ईंधन रोकने पर वाहन मालिकों और कर्मचारियों के बीच विवाद हो सकता है। उन्होंने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की पर्याप्त व्यवस्था की मांग की है।
बहरहाल, इस बार दिल्ली की जहरीली हवा से निपटने की रणनीति सिर्फ सड़क पर वाहनों की जांच तक सीमित नहीं है। ईंधन पंप से लेकर खेत, कारखाने से लेकर निर्माण स्थल और सड़क की धूल से लेकर यातायात जाम तक, प्रदूषण के हर स्रोत पर एक साथ शिकंजा कसने की तैयारी है। अब असली परीक्षा आदेशों की नहीं, बल्कि उनके जमीन पर ईमानदार और समयबद्ध अमल की होगी।