By अभिनय आकाश | Oct 01, 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड (RDL) के पूर्व डायरेक्टर नयन एन रहेजा की अग्रिम ज़मानत याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की दलीलें सुनीं। ट्रायल कोर्ट ने 19 सितंबर को उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस अमित बंसल ने आरोपी के सीनियर वकील और ED के वकील की शुरुआती दलीलें सुनीं। मामले की सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। ED की ओर से वकील रजत नायर पेश हुए और जवाब देने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा कि आवेदक जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। दूसरी ओर, नयन एन. रहेजा की ओर से सीनियर वकील विकास पाहवा पेश हुए। सीनियर वकील ने बताया कि रहेजा एक जाने-माने बिल्डर हैं। उन्होंने लगभग 15 प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। उन्होंने BPL कैटेगरी के लिए भी करीब 2000 फ्लैट बनाए हैं। आवेदक जांच में शामिल होने के लिए तैयार हैं। साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नयन एन. रहेजा की अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले, उन्हें ज़बरदस्ती की कार्रवाई से सुरक्षा दी गई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने घर खरीदारों को तय समय में फ़्लैट न सौंपने के मामले में केस दर्ज किया था। स्पेशल जज (PMLA) सचिन जैन ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नयन एन रहेजा की अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी। जज ने यह फ़ैसला उनके इस व्यवहार को देखते हुए लिया कि बुलाए जाने पर भी वे जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए।
यह तर्क दिया गया कि सभी FIR में यह आरोप लगाया गया था कि उनमें नामजद आरोपियों/संस्थाओं ने 'रहेजा रेवांता', 'रहेजा शिलास', 'रहेजा ट्रिनिटी', 'रहेजा ओमा', 'रहेजा मॉल', 'रहेजा अरण्य', 'रहेजा अथर्व' और 'वेदांता' जैसे प्रोजेक्ट्स के तहत ग्राहकों से रेजिडेंशियल फ्लैट और कमर्शियल स्पेस देने के नाम पर पैसे इकट्ठा किए थे; हालांकि, आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल करने के बजाय, कंपनी ने उस फंड का गलत इस्तेमाल किया और तैयार यूनिट्स की डिलीवरी नहीं की। आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि आरोपियों के खिलाफ मुख्य अपराधों (प्रेडिकेट ऑफेंस) में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है, इसलिए PMLA की धारा 3 के तहत उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई अपराध नहीं बनता है।