By अभिनय आकाश | Oct 27, 2026
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने 3.93 करोड़ रुपये के कथित साइबर फ्रॉड के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ताओं को शक है कि पैसे को निकालने और दूसरे लोगों को ट्रांसफर करने से पहले, कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया था। जांच में एक विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं, साथ ही हवाला चैनलों के जरिए 'टेथर' (USDT) नाम की क्रिप्टोकरेंसी खरीदने का भी पता चला है। ये गिरफ्तारियां नॉर्थ-वेस्ट जिले के साइबर सेल द्वारा की गई एक और बड़ी साइबर धोखाधड़ी की जांच के बाद हुई हैं। हाल ही में, इसी तरह के एक संगठित नेटवर्क से जुड़े 7.36 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में, एक बैंक मैनेजर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस मामले में, पुलिस ने 45 चेक बुक, 25 बैंक पासबुक, 45 एटीएम कार्ड और 13 मोबाइल फोन बरामद किए थे। जांचकर्ता जब्त की गई चीजों की जांच कर रहे हैं ताकि इसमें शामिल अन्य लोगों का पता लगाया जा सके।
जांच के सिलसिले में, दिल्ली पुलिस की एक टीम ने राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर और अन्य इलाकों में सात दिनों तक तलाशी ली और पूछताछ की। जांचकर्ताओं ने बैंक ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया और उन लोगों की पहचान की, जिनके खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर चोरी की गई रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें बीकानेर के रहने वाले पीयूष तलानिया और विपिन चंवरिया के साथ-साथ बृज लाल, सुनील, विक्रम, राकेश और हेमंत सिंह शामिल हैं। पुलिस को शक है कि इन आरोपियों ने बैंक खातों का इस्तेमाल करने, नकद निकालने और कथित धोखाधड़ी से मिली रकम को दूसरों तक पहुँचाने में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाईं।
जांचकर्ताओं ने पाया कि पैसे को सीधे एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के बजाय, कई बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया था। ऐसे खातों को 'म्यूल अकाउंट' (mule accounts) कहा जाता है। इनका इस्तेमाल साइबर अपराध से मिली रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा सकता है, जिससे पैसों के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। पुलिस के अनुसार, पीयूष तलानिया के बैंक खाते से 9.5 लाख रुपये निकाले गए और कथित तौर पर बृज लाल को सौंप दिए गए। पूछताछ के दौरान, विपिन चंवरिया ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने 12 अक्टूबर को बृज लाल के कहने पर 7 लाख रुपये निकाले और वह नकद रकम उसे दे दी। पुलिस का मानना है कि इस संदिग्ध नेटवर्क में बृज लाल की अहम भूमिका थी; वह अलग-अलग बैंक खातों के ज़रिए पैसे लेता था, नकद निकालता था और उसे आगे दूसरों तक पहुँचाता था।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में बृज लाल ने बताया कि 'यू होम' (U Home) नाम के एक विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप पर उसकी एक वॉलेट आईडी थी। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि क्या उसका किसी विदेशी साइबर नेटवर्क से कोई संबंध था और क्या पैसों को इधर-उधर करने के लिए हवाला चैनलों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस को शक है कि नकद निकालने से पहले, इन पैसों को कई बैंक खातों के ज़रिए घुमाया गया था। इसके बाद, इस नकद रकम को हवाला ऑपरेटरों के ज़रिए आगे भेजा गया, ताकि इसे USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदला जा सके। बृज लाल ने जांचकर्ताओं को बताया कि एक हवाला ऑपरेटर के कहने पर, यह नकद रकम खन्ना (Khanna) में एक व्यक्ति को सौंपी गई थी। पुलिस अब उस व्यक्ति की पहचान करने और इस नेटवर्क में उसकी कथित भूमिका का पता लगाने की कोशिश कर रही है।