DMK नेता ने स्कूलों से 400 करोड़ वसूले, TVK नेता Nirmal Kumar का गंभीर आरोप

निजी स्कूलों को मंजूरी और प्रमाणपत्र देने के बदले रिश्वत लेने के आरोप में तमिलनाडु के पूर्व शिक्षा मंत्री अनबिल महेश को गिरफ्तार किया गया है। टीवीके नेता निर्मल कुमार ने उन पर पार्टी फंड के नाम पर 400 करोड़ रुपये से अधिक वसूलने का आरोप लगाया है। इस मामले की जांच सेंट्रल क्राइम ब्रांच और ईडी कर रही हैं।
तमिलनाडु के मंत्री निर्मल कुमार ने आरोप लगाया है कि DMK नेता और पूर्व स्कूली शिक्षा मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी ने एक ही साल में स्कूलों से सर्टिफिकेट जारी करने के नाम पर पैसे वसूले और इस तरह पार्टी फंड के लिए 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम जमा की। निजी स्कूलों से जुड़े 100 करोड़ रुपये के रिश्वत मामले में महेश की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए, TVK नेता निर्मल कुमार ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन को सर्टिफिकेट के लिए पैसे देने पर मजबूर किया गया और वसूली गई यह रकम पार्टी फंड में डाल दी गई। उन्होंने कहा कि हमने एक ऐसे मंत्री को गिरफ्तार किया है जिसने पार्टी फंड के नाम पर 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम वसूली है। यह DMK के लिए बहुत शर्म की बात है। उन्होंने पैसे ऐंठने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने सर्टिफिकेट जारी करने के बदले पैसे मांगे और स्कूलों से यह रकम वसूली। अब, स्कूल खुद आगे आकर शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने सर्टिफिकेट के ज़रिए एक साल में 400 करोड़ रुपये बना लिए। टीवीके के मंत्री ने DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टालिन ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रेरित और बदले की कार्रवाई बताया है।
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अनबिल महेश के खिलाफ क्या मामला है?
सोमवार को ग्रेटर चेन्नई पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने अनबिल महेश को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी निजी स्कूलों के लिए मंजूरियां और कानूनी क्लीयरेंस से जुड़े 100 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले में हुई है। मद्रास हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के कुछ ही समय बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला इन आरोपों के इर्द-गिर्द घूमता है कि स्थायी मान्यता और अन्य प्रशासनिक मंजूरियां देने के बदले में 1,000 से अधिक निजी स्कूल प्रबंधन से पैसे वसूले गए। आरोप है कि 2021 से 2026 के बीच, जब महेश स्कूल शिक्षा मंत्री थे, तब 'पार्टी फंड' के नाम पर ये पैसे लिए गए थे। CCB ने 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी 'धन शोधन निवारण अधिनियम' (Prevention of Money Laundering Act) के तहत मामला दर्ज किया है। इन आरोपों की जांच चल रही है और अभी तक अदालत में ये साबित नहीं हुए हैं।
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