By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 04, 2020
नयी दिल्ली। एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों से संबंधित मामले में बुधवार को सामाजिक कार्यकर्ता खालिद सैफी को जमानत प्रदान कर दी और कहा कि सैफी के खिलाफ महत्वहीन सामग्री के आधार पर तैयार किए गए आरोपपत्र में पुलिस ने कोई दिमाग नहीं लगाया और बदले की भावना तक चली गयी। अदालत यह भी समझने में नाकाम रही कि साजिश रचने के दावे का केवल एक गवाह के बयान के आधार पर कैसे अनुमान लगाया जा सकता था?
अदालत ने कहा कि यदि सैफी ही मुख्य अरोपी ताहिर हुसैन को बैठक में ले गया था तब सैफी को भी ताहिर हुसैन की तरह अन्य 10 मामलों में सह-आरोपी बनाया जाना चाहिए था, जो मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि गवाह का बयान 27 सितंबर को दर्ज किया गया जो अपने आप में इसकी विश्वसनीयता को दर्शाता है।