क्षेत्रफल के मामले में सबसे बड़ा केंद्रशासित प्रदेश है J&K, परिसीमन के बाद बढेंगी 7 विधानसभा सीटें

By अनुराग गुप्ता | Aug 01, 2020

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से 5 अगस्त, 2019 को आर्टिकल 370 के प्रावधानों को समाप्त कर दिया था। जिसके बाद 31 अक्टूबर, 2019 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बन गए थे। केंद्रशासित प्रदेश बनने के साथ ही यहां पर संसद के बने कई कानून लागू हो गए जो पहले आर्टिकल 370 की वजह से लागू नहीं हो सके थे।

जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश तो बना ही साथ ही साथ इसका पुनर्गठन भी हो गया था। जिसके तहत लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बना और जम्मू-कश्मीर ऐसा केंद्रशासित प्रदेश बना जहां पर विधानसभा मौजूद है। जम्मू-कश्मीर में मौजूद राज्यपाल का पद भी समाप्त हो गया और फिर दोनों केंद्रशासित प्रदेश में उप-राज्यपाल पद की व्यवस्था की गई। जिसके तहत गिरीश चंद्र मुर्मू को जम्मू कश्मीर का त राधा कृष्ण माथुर को लद्दाख का उप-राज्यपाल नियुक्त किया गया था। 

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद देश में कुल 9 केंद्रशासित प्रदेश हो गए हैं। ऐसे में क्षेत्रफल के हिसाब से जम्मू-कश्मीर देश का सबसे बड़ा केंद्रशासित प्रदेश बन गया है। वहीं लद्दाख दूसरे नंबर पर मौजूद है। जम्मू कश्मीर का क्षेत्रफल कुल 1,63,040 वर्ग किमी है जबकि लद्दाख का 59,196 वर्ग किमी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू कश्मीर की आबादी 1,25,41,302 बताई जाती है और लद्दाख की 2,74,289 है। आबादी के मामले में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बाद जम्मू-कश्मीर दूसरा सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश है। 

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जम्मू-कश्मीर की बढेंगी 7 सीटें

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों के परिसीमन का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने परिसीमन आयोग का भी गठन किया है। इस आयोग की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है। बता दें कि पुनर्गठन के बाद जम्मू-कश्मीर में सात विधानसभा सीटें बढ़ना तय बताया जा रहा है। जिसके बाद सीटों की संख्या बढ़कर 114 हो जाएगी।

जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से पहले विधानसभा में 87 सीटें थीं। जिनमें लद्दाख की चार सीटें भी शामिल थीं। हालांकि, 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के लिए आरक्षित थीं, जिन्हें खाली रखा जाता था। ऐसे में सीटों की कुल संख्या 111 थी। लेकिन लद्दाख एक नया केंद्रशासित प्रदेश बन गया है और पुनर्गठन के बाद लद्दाख की चार सीटें कम हो गई हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 107 सीटें बचती हैं। माना जा रहा है कि परिसीमन के बाद 7 सीटें बढ़ जाएगी और इनकी संख्या बढ़कर 114 हो जाएंगी। 

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सांसदों की संख्या में नहीं होगा बदलाव

जम्मू-कश्मीर में पहले की ही तरह सांसदों की संख्या रहेगी। इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। बता दें कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लोकसभा की 6 और राज्यसभा की 4 सीटें हैं।

साल 1995 में जम्मू कश्मीर का परिसीमन हुआ था। उस वक्त विधानसभा की सीटें 75 से बढ़ाकर 87 कर दी गई थी फिर बाद में फारूक अब्दुल्ला सरकार ने जम्मू कश्मीर विधानसभा में प्रस्ताव पास कर परिसीमन पर रोक लगा दी थी।

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