डिमांड एंड सप्लाई (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Aug 18, 2026

सांस्कृतिक संस्था ने विचार गोष्ठी का आयोजन किया। विद्रोही महिला वक्ता ने कहा, दकियानूसी समाज ने हमें हमेशा दबाव में रखा। अब लड़कियां हर क्षेत्र में आगे निकल रही हैं। हमने डांस को एक नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। हम वैसा नाच रही हैं जैसा ज़माना चाहता है। सफलता हर स्थिति में बहुत ज़रूरी है। मेरा यह मानना है कि सिर्फ एक डांस पूरे देश को हिला सकता है।

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चाय और बढ़िया नाश्ते के साथ गोष्ठी निबटाकर निकले तो मित्र कहने लगे, लोकतंत्र स्थायी खुश्गवार मौसम की तरह है जिसमें सबका अपना अपना मंत्र, तंत्र, यंत्र और षड्यंत्र है। जिसके अंतर्गत  रिश्वत, पैसा, जान पहचान, जातिवाद, धर्म, गुंडागर्दी का प्रयोग किया जाता है । यह डिमांड एंड सप्लाई आधारित लोकतांत्रिक फार्मूला है। राजनीति की डिमांड पैसा है जिसे चुनाव सप्लाई करवाता है। उद्योगपति रियायत की डिमांड करते हैं जिसके बदले वे पैसा सप्लाई करते हैं । वोटर अपनी ज़रूरतों के बदले वोट सप्लाई करते हैं। चुनाव जनता को सरकार सप्लाई करता है फिर सरकार सुविधानुसार जातिवाद, साम्प्रदायिकता, नौकरियां, शिक्षा, स्वास्थ्य और महंगाई वगैरा सप्लाई करती है।

पत्नी ने डिमांड रखी तो सूचना सप्लाई की, कि कहां और क्यूं गया था। बोली, कुछ पुरातनपंथी यूं ही शोर मचाते हैं वरना प्रसिद्ध अभिनेत्रियों का नाचगाना डिमांड एंड सप्लाई पर आधारित है। समाज में होशियार, चालू, नंगे हो जाने वालों की डिमांड बढ़ती जा रही है। कई सीरियल एक बार अपनी डिमांड बना लेते हैं फिर कुछ भी सप्लाई करते रहते हैं। अफसरों की डिमांड पर बहुत कुछ सप्लाई होता है। अभिभावकों की डिमांड अच्छा परिणाम होती है तभी स्कूल के अध्यापक टयूशन और कोचिंग सप्लाई करते हैं। 

देश की जनता भोली भाली है। उसे कुछ भी सप्लाई कर दो वह ज्यादा आपत्ति नहीं करती। पत्नी को बताया कि अश्लीलता को रोकने के लिए सरकार बहुत ज्यादा सख्त कानून बना रही है। वह ठहाका लगा कर हंसी और बोली, आजकल रोज़ी रोटी के साथ ऐश और आराम भी ज़रूरी है। बहुत गलाकाटू प्रतिस्पर्धा है। नए नए धंधे डिमांड में हैं। सभी नए ढंग से नाच रहे हैं। शरीर सबसे आकर्षक उत्पाद है। जब देश लूटना,  माता पिता, पत्नी, प्रेमिका, भाई को मारना, शिष्या का रेप करना बुरा नहीं माना जाता, नैतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय ज़िम्मेवारियों का डिमांड में न रहना ग़लत नहीं है तो टीवी, फिल्म या मंच पर शरीर दिखाकर पैसा कमाना क्यों बुरा माना जाता है। जिसके पास जो है वही सप्लाई करेगा ताकि डिमांड का पता चले। पूरा फार्मूला पूरी तरह से आर्थिक सिद्धांत पर आधारित है।

पत्नी ने कहा, मुझे ऑनलाइन एक वेस्टर्न ड्रेस पसंद आई है। काफी रोमांटिक है लेकिन ज़माने की तरह ज्यादा पारदर्शी नहीं। ज्यादा महंगी भी नहीं। मैने पूछा कितने की है तो हंसकर कहने लगी, डिमांड के सामने रेट की औकात नहीं होती सिर्फ सप्लाई की इज्ज़त होती है।

- संतोष उत्सुक

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