Prabhasakshi NewsRoom: युद्धविराम के बावजूद America ने कर दिया Iran पर हमला! पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण

By नीरज कुमार दुबे | May 26, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। युद्धविराम लागू होने के बावजूद अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में कई ठिकानों पर जोरदार सैन्य हमला किया है जिससे पूरे पश्चिम एशिया में हलचल मच गई है। अमेरिकी सेना ने इन हमलों को आत्मरक्षा की कार्रवाई बताया है, लेकिन ईरान इसे खुली आक्रामकता मान रहा है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे हैं कि ईरान के साथ बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि जमीनी हालात यह संकेत दे रहे हैं कि दोनों देशों के बीच अविश्वास और टकराव पहले से कहीं ज्यादा गहरा चुका है।

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हम आपको बता दें कि ये हमले बंदर अब्बास के आसपास हुए, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण बंदरगाह क्षेत्र है। स्थानीय लोगों ने कई विस्फोटों की आवाजें सुनीं। सीरिक और जास्क जैसे तटीय इलाकों में भी धमाकों जैसी आवाजें सुनाई देने की खबर सामने आई। ईरानी समाचार माध्यमों ने घटनाओं की पुष्टि की, हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में बताया।

उधर, इन हमलों के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। कतर की राजधानी दोहा में ईरानी अधिकारियों और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा पूरी तरह खोलने, आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने और ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को लेकर समाधान खोजने पर विचार हो रहा है। बताया जा रहा है कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान लगभग तीस दिनों के भीतर समुद्री सुरंगें हटाएगा और उसके बाद सभी देशों के जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा है कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु मुद्दे पर समयबद्ध वार्ता के लिए एक मजबूत प्रस्ताव मेज पर मौजूद है। हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका दूसरे तरीके अपनाने के लिए भी तैयार है।

इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के समृद्ध यूरेनियम को या तो अमेरिका को सौंपना होगा या फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी में नष्ट करना होगा। ट्रंप का कहना है कि किसी भी अंतिम समझौते में यह शर्त अनिवार्य होनी चाहिए।

ट्रंप ने एक और विवादास्पद प्रस्ताव रखते हुए कहा कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को अब्राहम समझौते में शामिल होना चाहिए। इस समझौते का उद्देश्य इजराइल के साथ संबंध सामान्य करना है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव बातचीत को और जटिल बना सकता है। सऊदी अरब पहले ही कह चुका है कि फिलिस्तीनी राज्य के मुद्दे पर प्रगति के बिना वह इजराइल के साथ संबंध सामान्य नहीं करेगा, जबकि पाकिस्तान के इजराइल के साथ राजनयिक संबंध ही नहीं हैं।

उधर, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी मिसाइल हमलों में रिहायशी इलाकों और खेल परिसर को निशाना बनाया गया, जिसमें बच्चों, महिलाओं और किशोर खिलाड़ियों सहित कई नागरिक मारे गए। ईरान का कहना है कि इन हमलों में विशेष प्रकार की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिनसे हजारों घातक धातु कण चारों ओर फैल गए। ईरानी पक्ष ने इसे जानबूझकर किया गया हमला बताते हुए अंतरराष्ट्रीय अदालत में कार्रवाई की मांग की है।

इसी बीच, ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि देश ने एक आधुनिक गुप्त ड्रोन को मार गिराया है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार नई वायु रक्षा प्रणाली की मदद से इस ड्रोन को नष्ट किया गया। ईरान ने यह भी कहा कि अब फारस की खाड़ी के ऊपर कोई भी गुप्त ड्रोन आसानी से प्रवेश नहीं कर सकेगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ड्रोन किस देश का था।

वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है, जहां से पश्चिम एशिया के तेल और गैस का विशाल हिस्सा दुनिया भर में भेजा जाता है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर पड़ सकता है।

उधर, विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा अमेरिकी हमले केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि ईरान की समुद्री क्षमता और गतिविधियों की जानकारी जुटाने का प्रयास भी हो सकते हैं। पूर्व अमेरिकी राजनयिक एडम क्लेमेंट्स ने कहा है कि यदि ईरान वास्तव में समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहा था तो अमेरिकी प्रतिक्रिया असामान्य नहीं कही जा सकती। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि क्षेत्र में अविश्वास और तनाव अभी भी बहुत अधिक है।

बहरहाल, युद्धविराम के बावजूद पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक ओर बातचीत के जरिये समाधान निकालने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाइयां और आरोप प्रत्यारोप माहौल को और तनावपूर्ण बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीति सफल होती है या क्षेत्र एक बार फिर खुले संघर्ष की ओर बढ़ता है।

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